उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने विधायकों को अपने पाले में रखने की कवायद तेज कर दी है। चुनाव में एक सीट के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट जरूरी हैं। ऐसे में अतिरिक्त सीट के लिए दोनों प्रमुख दलों को दूसरे विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
समाजवादी पार्टी ने रामगोपाल यादव और धनराज नथवानी को उम्मीदवार बनाया है और तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी रणनीति पर चर्चा चल रही है। वहीं, भाजपा की ओर से उम्मीदवारों को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। ऐसे में विधायकों के समर्थन और संभावित क्रॉसवोटिंग को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।
10वीं सीट पर नजर
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को मतदान होना है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर भाजपा-एनडीए के पास सात सीटें निकालने के लिए पर्याप्त संख्या बताई जा रही है, जबकि सपा के लिए दो सीटों का गणित मजबूत है। अतिरिक्त सीट के लिए दोनों पक्षों को अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा।
विधायकों के रुख पर नजर
चुनाव से पहले असंतुष्ट और दूसरे दलों के साथ समीकरण रखने वाले विधायकों की भूमिका अहम हो गई है। पिछले राज्यसभा चुनाव में भी क्रॉसवोटिंग देखने को मिली थी। इस बार पार्टियां अपने विधायकों के रुख और संभावित समर्थन को लेकर लगातार रणनीति बना रही हैं।
वोटों का गणित क्यों अहम?
विधानसभा में रिक्त सीटों के चलते प्रभावी सदस्य संख्या घट गई है। ऐसे में 37 प्रथम वरीयता वोट का आंकड़ा प्रत्येक सीट के लिए महत्वपूर्ण है। अतिरिक्त सीट हासिल करने के लिए जरूरी संख्या पूरी करना ही दोनों दलों के सामने मुख्य चुनौती है।
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ उम्मीदवारों की संख्या और विधायकों के समर्थन का अंतिम गणित तस्वीर को और स्पष्ट करेगा।
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