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जातीय समीकरणों के बीच भाजपा की नई रणनीति, ‘तब बनाम अब’ से PDA का जवाब देने की कोशिश

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और भाजपा की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव जहां PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के मुद्दे पर जोर दे रहे हैं, वहीं भाजपा अपने अभियान में ‘तब बनाम अब’ के जरिए पिछली सपा सरकार और मौजूदा भाजपा सरकार के कार्यकाल की तुलना कर रही है।

भाजपा की ओर से अपने कार्यक्रमों में 2017 से पहले और उसके बाद उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों का अंतर बताने पर जोर दिया जा रहा है। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से भी इन मुद्दों को जनता तक पहुंचाने को कहा जा रहा है।

सपा सरकार के कार्यकाल को बना रही मुद्दा

भाजपा नेताओं के भाषणों में सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए दंगों, अपराध और माफिया से जुड़े मामलों का उल्लेख किया जा रहा है। पार्टी की ओर से मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद और आजम खान जैसे नामों का भी जिक्र किया जा रहा है।

वहीं, भाजपा सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था में सुधार, अपराधियों पर कार्रवाई, एक्सप्रेसवे, मेट्रो और रैपिड रेल परियोजनाओं के साथ औद्योगिक निवेश और मेडिकल कॉलेजों को अपनी उपलब्धियों के तौर पर बताया जा रहा है।

जातीय मुद्दों पर भी फोकस

PDA के जरिए सपा के पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को जोड़ने के प्रयासों के बीच भाजपा भी जातीय समीकरणों को लेकर सक्रिय है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुर्जर और जाट समुदाय को लेकर दोनों दलों की गतिविधियां बढ़ी हैं।

मेरठ में आयोजित भाजपा के शक्ति केंद्र संयोजक सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा पर जातीय भेदभाव को बढ़ावा देने और महापुरुषों को जातियों में बांटने का आरोप लगाया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से इन मुद्दों को जनता के बीच रखने की अपील की।

मेरठ में भाजपा नेताओं ने साधा निशाना

कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सपा की पिछली सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए। नेताओं ने कानून-व्यवस्था और अपराध के मुद्दे पर सपा को घेरा और भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों को सामने रखा।

भाजपा का ‘तब बनाम अब’ अभियान आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपने शासन के कार्यों को प्रमुखता से रखने की रणनीति का हिस्सा है। वहीं, सपा PDA के जरिए सामाजिक समूहों को अपने साथ जोड़ने पर जोर दे रही है। चुनाव से पहले दोनों दलों की रणनीति और अभियान आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।

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