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यूपी में विधायक को लेकर बढ़ा विवाद, समर्थन और विरोध में आमने-सामने आईं कई गांवों की बिरादरियां

जिले के लोनी में एक प्रेसवार्ता से शुरू हुआ विवाद अब भाजपा के भीतर आमने-सामने की स्थिति तक पहुंच गया है। रविवार को विधायक नंदकिशोर गुर्जर के समर्थन और विरोध में अलग-अलग स्थानों पर दो महापंचायतें हुईं। दोनों पंचायतों में बड़ी संख्या में लोग जुटे और एक-दूसरे पक्ष पर आरोप लगाए गए। विवाद के चलते क्षेत्र का सियासी माहौल गरमा गया है और पुलिस भी अलर्ट है।

विधायक नंदकिशोर गुर्जर के समर्थन में महापंचायत

सिरौली गांव स्थित एक स्कूल में लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर के समर्थन में महापंचायत आयोजित की गई। आयोजकों ने इसे 36 बिरादरियों की हिंदू महापंचायत बताया। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग इसमें पहुंचे।

महापंचायत में हाल की आपराधिक घटनाओं, सामाजिक विवाद और कानून-व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान तीन प्रस्ताव भी पारित किए गए। पहले प्रस्ताव में 36 बिरादरियों के विधायक नंदकिशोर गुर्जर के साथ होने का दावा किया गया।

दूसरे प्रस्ताव में विधायक का विरोध करने वाले भाजपा नेताओं की भूमिका की जांच कराने की मांग की गई। वहीं तीसरे प्रस्ताव में सामाजिक विवादों के समाधान के लिए 51 सदस्यीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया।

महापंचायत को संबोधित करते हुए विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने कहा कि वह हिंदुत्व और गौरक्षा के मुद्दे पर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने लोनी की शांति खराब करने वालों का विरोध करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

अनिल कसाना के समर्थन में 12 गांवों की पंचायत

दूसरी महापंचायत रिस्तल गांव में हुई। इसमें भाजपा नेता अनिल कसाना के समर्थन में और लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर के विरोध में लोग जुटे। इस पंचायत में कोतवालपुर, राजपुर, भूपखेड़ी, धारीपुर, सिरोरा, रेवड़ी, गढ़ी कलजरी, जावली, रिस्तल, महमूदपुर, शकलपुर और सीती समेत 12 गांवों के लोग शामिल हुए।

पंचायत में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने समाज के लोगों के साथ अभद्रता की है। इसे लेकर निंदा प्रस्ताव भी पेश किया गया। साथ ही भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से विधायक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। पंचायत में सामाजिक सौहार्द, शांति और भाईचारा बनाए रखने का संकल्प भी लिया गया।

अनिल कसाना ने कहा कि यह मामला चुनाव या राजनीति का नहीं, बल्कि समाज के सम्मान का मामला है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जनता इसका जवाब देगी।

पांच सितंबर की प्रेसवार्ता के बाद बढ़ा विवाद

पूरे विवाद की शुरुआत पांच सितंबर को हुई थी। लोनी के दो नंबर स्थित एक रेस्टोरेंट में भाजपा नेता अनिल कसाना ने हाजी सलमान द्वारा एक हिंदू युवक से कथित मारपीट के बाद बिगड़े माहौल को लेकर प्रेसवार्ता की थी। इसमें पूर्व विधायक और सपा नेता जाकिर अली समेत अन्य लोग मौजूद थे।

प्रेसवार्ता के बाद लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर वहां पहुंचे। इसी दौरान अनिल कसाना और विधायक के बीच तीखी बहस और विवाद हो गया। इसके बाद मामला और गरमा गया। घटना से जुड़ा विधायक का अनिल कसाना समेत प्रेसवार्ता में मौजूद नेताओं को गाली देने का कथित वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। हालांकि वीडियो सामने आने के बाद विधायक ने गाली देने से इनकार किया था।

पुलिस ने करीब 1000 लोगों को किया पाबंद

विवाद और क्षेत्र में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने सतर्कता बढ़ा दी है। डीसीपी देहात सुरेंद्र नाथ तिवारी के अनुसार करीब 1000 लोगों को शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पाबंद किया गया है। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनसे क्षेत्र का माहौल खराब होने की आशंका है।

पुलिस पंचायतों और अन्य कार्यक्रमों में शामिल लोगों की भी निगरानी कर रही है। हालांकि पंचायतों के लिए अलग से पुलिस बल तैनात नहीं किया गया था और स्थानीय पुलिस ही पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही थी।

भाजपा ने बताया दोनों पक्षों का आपसी मामला

भाजपा के जिला अध्यक्ष चैनपाल सिंह ने कहा कि यह दोनों पक्षों का आपसी मामला है और पार्टी से जुड़ा कोई विवाद नहीं है। उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी हाईकमान को दे दी गई है।

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