श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एसबीआई लॉकर में सुरक्षित बहुमूल्य आभूषणों, दान में मिली वस्तुओं और अन्य कीमती सामान के सत्यापन का कार्य पूरा होने की ओर है। इस दौरान ट्रस्ट की ओर से लॉकर में रखी वस्तुओं की 360 डिग्री कैमरे से वीडियोग्राफी कराई जा रही थी, लेकिन भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने इस पर आपत्ति जताई। बैंक अधिकारियों का कहना था कि शाखा में अन्य ग्राहकों के लॉकर भी मौजूद हैं और इस तरह की रिकॉर्डिंग से बैंक की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है। बैंक के अनुरोध के बाद ट्रस्ट ने फिलहाल वीडियोग्राफी की प्रक्रिया रोक दी।
हालांकि, वीडियोग्राफी बंद होने के बावजूद सत्यापन कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहा। ट्रस्ट और बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में लॉकरों और खातों का मिलान किया गया तथा लॉकर में रखी प्रत्येक वस्तु का बारीकी से सत्यापन किया गया। सूत्रों के अनुसार, सत्यापन के दौरान हर आभूषण, बहुमूल्य वस्तु और दान सामग्री का अलग-अलग दस्तावेजी रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की विसंगति की स्थिति में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध रहे।
डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने पर जोर
ट्रस्ट सत्यापन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है। प्रत्येक वस्तु का विवरण डिजिटल रूप में दर्ज किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, सत्यापन पूरा होने के बाद इस डिजिटल रिकॉर्ड को ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने की तैयारी है। इससे भक्तों को मंदिर में दान की गई बहुमूल्य वस्तुओं की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेगी और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
बैंक ने गोपनीयता का दिया हवाला
सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को एसबीआई के अधिकारियों ने ट्रस्ट को बताया कि बैंक परिसर में अन्य ग्राहकों के लॉकर भी हैं। ऐसे में 360 डिग्री कैमरे से की जा रही रिकॉर्डिंग में बैंक के संवेदनशील हिस्से और अन्य लॉकर भी कैद हो सकते हैं, जिससे ग्राहकों की गोपनीयता प्रभावित होने की आशंका है। इसी कारण बैंक ने वीडियोग्राफी पर आपत्ति दर्ज कराई, जिसे स्वीकार करते हुए ट्रस्ट ने रिकॉर्डिंग फिलहाल रोक दी।
जांच के दायरे में चढ़ावे का पूरा रिकॉर्ड
राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच के बीच ट्रस्ट के लॉकरों में रखे बहुमूल्य सामान का सत्यापन लगातार सुर्खियों में है। जांच एजेंसियां दान में मिले आभूषणों, कीमती वस्तुओं और उनके रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं। ट्रस्ट का कहना है कि सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद पूरी व्यवस्था पहले से अधिक पारदर्शी होगी और भविष्य में दान से जुड़ी जानकारी सुरक्षित एवं व्यवस्थित रूप से उपलब्ध रहेगी।
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