त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले देश में खाद्य महंगाई ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक महीने में चीनी और चावल की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर मानसून, अल-नीनो की आशंका, वैश्विक अनिश्चितता और जमाखोरी जैसी वजहों से आने वाले दिनों में कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार, देशभर में चीनी की थोक कीमत एक महीने में 5 प्रतिशत से अधिक बढ़कर औसतन 4,593 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई है। खुदरा बाजार में चीनी का औसत भाव 47.11 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 49.53 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। पिछले एक वर्ष में चीनी की कीमतों में 7.64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
चावल की खुदरा कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है। अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य एक महीने में 44.13 रुपये से बढ़कर 45.13 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों में चावल की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में पुराने चीनी स्टॉक का कम होना तथा इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के अधिक उपयोग से चीनी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। वहीं, चावल की कीमतों पर कमजोर मानसून, अल-नीनो के प्रभाव, उत्पादन संबंधी आशंकाओं और जमाखोरी का असर पड़ा है।
प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना कृषि विश्वविद्यालय की एक नीति रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि अल-नीनो के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ और बड़े पैमाने पर भंडारण बढ़ा, तो वैश्विक बाजार में चावल की कीमतें 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहीं तो आने वाले दिनों में मिठाइयों, बेकरी उत्पादों, प्रोसेस्ड फूड, इलेक्ट्रॉनिक सामान और घरेलू उपकरणों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है, जिससे त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।
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