संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक में अमेरिका और फ्रांस के बीच तीखी कूटनीतिक तनातनी देखने को मिली। मानवाधिकारों के मुद्दे पर फ्रांस की आलोचना से नाराज़ अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने बैठक के दौरान वॉकआउट कर दिया। यह घटनाक्रम दोनों सहयोगी देशों के रिश्तों में बढ़ती खटास का संकेत माना जा रहा है।
दरअसल, विवाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क के दूसरे कार्यकाल को लेकर शुरू हुआ। फ्रांस ने उनके समर्थन में मतदान किया, जबकि अमेरिका ने इसका विरोध किया। इसके बाद फ्रांस के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने सोशल मीडिया पर अमेरिका के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि वह अब मानवाधिकारों का नेतृत्व करने की स्थिति में नहीं है।
फ्रांस की इस टिप्पणी पर अमेरिका ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी उप राजदूत डैन नेग्रिया ने फ्रांस पर नैतिकता का दिखावा करने और दुनिया को मानवाधिकारों का पाठ पढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब तक फ्रांस अपने “अहंकारी रवैये” में बदलाव नहीं करता, अमेरिका ऐसे राजनीतिक भाषणों को सुनने में समय बर्बाद नहीं करेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार यह विवाद केवल मानवाधिकारों तक सीमित नहीं है। नाटो, यूरोप की सुरक्षा, ईरान युद्ध, ग्रीनलैंड और ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति जैसे कई मुद्दों पर भी अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच मतभेद लगातार गहराते जा रहे हैं।
बैठक के अंत में फ्रांस के संयुक्त राष्ट्र राजदूत जेरोम बोनाफोंट ने वॉकआउट पर कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि फ्रांस संयुक्त राष्ट्र के चार्टर, मानवाधिकारों और वैश्विक शांति के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहेगा।
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