उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में भारत-नेपाल सीमा पर सक्रिय एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जो मोटी रकम लेकर लोगों को अवैध तरीके से सीमा पार कराता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह यात्रियों की पहचान, यात्रा का उद्देश्य और दस्तावेजों की स्थिति का आकलन करने के बाद जोखिम के आधार पर रकम तय करता था। सुरक्षा एजेंसियां अब पूरे मॉड्यूल के संचालन, आर्थिक लेन-देन और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की गहन जांच कर रही हैं।
जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए तीन स्थानीय आरोपियों की भूमिका भी स्पष्ट हुई है। इनमें रुपईडीहा के केवलपुर गांव निवासी इनोवा चालक राहुल कुमार, उसके सहयोगी सुरेश कुमार पाठक और महानंद पुरवा निवासी दिलीप शामिल हैं। तीनों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि नेटवर्क के अन्य सदस्यों, सीमा पार मौजूद संपर्कों और अवैध गतिविधियों के पूरे तंत्र का खुलासा किया जा सके।
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की जांच अब आर्थिक पहलुओं तक भी पहुंच गई है। शुरुआती पड़ताल में संकेत मिले हैं कि आरोपियों ने पिछले कुछ वर्षों में जमीन, मकान और अन्य संपत्तियां खरीदी हैं। इसके बाद पुलिस ने उनके बैंक खातों, आय के स्रोतों और संपत्तियों की वैधता की जांच शुरू कर दी है। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति, संदिग्ध लेन-देन या अवैध कमाई के प्रमाण मिलते हैं तो उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य संबंधित धाराओं में भी कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की जानकारी मिलते ही पंजाब पुलिस से संपर्क किया गया था। शुक्रवार को पंजाब पुलिस की टीम रुपईडीहा पहुंची और कानूनी प्रक्रिया में शामिल हुई। ट्रांजिट रिमांड की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अजनाला कांड के वांछित आरोपी विक्रमजीत सिंह को पंजाब ले जाया जाएगा।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और सुनियोजित तरीके से लोगों को सीमा पार कराने का काम कर रहा था। अब जांच का दायरा बढ़ाकर यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह के तार किन-किन राज्यों और सीमा पार मौजूद लोगों से जुड़े थे। साथ ही पिछले वर्षों में इस नेटवर्क के जरिए कितने लोगों को अवैध रूप से सीमा पार कराया गया, इसकी भी विस्तृत जांच की जा रही है।
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