ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका ने लगातार 10वें दिन ईरान के खिलाफ हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) के मुताबिक, ताजा हमलों में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास मौजूद ईरानी सैन्य ठिकानों, तटीय रक्षा प्रणाली, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स तथा समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों को रोकना और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री आवाजाही बहाल करना है।
इस बीच ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी पाकिस्तान पहुंच गए हैं। रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर उनका स्वागत पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने किया। दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि पाकिस्तान एक बार फिर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम कराने के लिए कूटनीतिक भूमिका निभा सकता है।
सेंटकॉम ने बताया कि अमेरिकी नौसेना और वायुसेना अरब सागर में लगातार अभियान चला रही हैं। अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस बॉक्सर से उड़ान संचालन जारी है और ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले समुद्री यातायात पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। अमेरिका का दावा है कि अब तक कई वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला गया है और एक जहाज को निष्क्रिय भी किया गया है।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सात जुलाई से दोबारा शुरू हुए सैन्य अभियान के बाद अब तक करीब 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। रक्षा विभाग के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने कहा कि अधिकांश सैनिकों को मामूली चोटें आई थीं और 96 प्रतिशत सैनिक इलाज के बाद दोबारा ड्यूटी पर लौट चुके हैं। हालांकि, हालिया हमलों में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत और कई अन्य के घायल होने की घटनाओं ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है।
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि तबरीज, बंदर इमाम खोमैनी, सीरिक, जास्क, कोनारक और चाबहार समेत कई इलाकों को निशाना बनाया गया। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, तबरीज के पास हुए हमले में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संचालन केंद्र (UKMTO) के अनुसार, ओमान के पास एक तेल टैंकर पर अज्ञात हथियार से हमला किया गया। इससे एक दिन पहले भी इसी समुद्री मार्ग में दो अन्य जहाजों को निशाना बनाया गया था। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए यहां बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए चिंता का विषय बन गया है।
लगातार बढ़ते सैन्य हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध की आशंका बनी हुई है। हालांकि पाकिस्तान समेत कुछ देशों की कूटनीतिक पहल से बातचीत की उम्मीदें अभी भी कायम हैं, लेकिन मौजूदा हालात फिलहाल किसी त्वरित शांति समझौते की ओर इशारा नहीं करते।
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