22 जून से शुरू होने वाला कारोबारी सप्ताह शेयर बाजार के लिए काफी अहम रहने वाला है। मुहर्रम के कारण 26 जून को बाजार बंद रहेगा, ऐसे में इस सप्ताह केवल चार कारोबारी सत्र होंगे। बाजार की दिशा तय करने में अमेरिका-ईरान तनाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, आईटी शेयरों का प्रदर्शन और तकनीकी संकेतक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,850-23,800 का स्तर मजबूत सपोर्ट जोन माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो इंडेक्स 23,500 तक फिसल सकता है। वहीं, 24,150-24,200 का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस रहेगा। इस स्तर को पार करने पर निफ्टी 24,500 के आंकड़े तक पहुंच सकता है।
बाजार की नजर अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक घटनाक्रम पर भी रहेगी। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत जारी है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती बयानबाजी का असर वैश्विक बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
आईटी सेक्टर में दबाव बना रह सकता है। पिछले कारोबारी सत्र में इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसे प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई थी। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी कंपनी एक्सेंचर द्वारा अपने राजस्व वृद्धि अनुमान में कटौती करना रहा। विश्लेषकों का मानना है कि इसका असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी पड़ सकता है।
वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बाजार में वापसी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। लंबे समय तक बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों ने बीते सप्ताह भारतीय बाजार में करीब 3,400 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने भी 7,100 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी की।
मुद्रा बाजार में भी स्थिरता देखने को मिली है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 94.32 के स्तर पर लगभग स्थिर बंद हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक के कदमों और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से रुपये को समर्थन मिला है।
विश्लेषकों के अनुसार, बाजार का व्यापक रुख फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है। हालांकि वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की रणनीति और तकनीकी स्तरों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
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