मुजफ्फरनगर के चर्चित राजेंद्र सैनी हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने शनिवार को दो दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानते हुए कहा कि किसी की जान लेने का अधिकार सिर्फ भगवान को है। जो व्यक्ति किसी दूसरे की जिंदगी छीनता है, उसे खुद भी जिंदा रहने का अधिकार नहीं है।
फैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि दोषियों ने हत्या के बाद शव को जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश की। फिल्मों और टीवी शो से प्रभावित होकर उन्हें लगा कि यदि शव नहीं मिलेगा तो मामला भी साबित नहीं होगा, लेकिन सच कभी छिप नहीं सकता। अदालत ने कहा कि यदि ऐसे मामलों में नरमी बरती गई तो समाज में गलत संदेश जाएगा।
यह मामला 5 जून 2018 का है। मीरापुर क्षेत्र के जंगल में 35 वर्षीय राजेंद्र सैनी का जला हुआ शव मिला था। शव इतनी बुरी तरह जल चुका था कि उसकी पहचान संभव नहीं थी। बाद में डीएनए जांच के जरिए शव की पहचान राजेंद्र सैनी के रूप में हुई।
पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी वीरसेन को अपनी पत्नी और राजेंद्र सैनी के बीच संबंध होने का शक था। इसी शक के चलते उसने गजेंद्र उर्फ गीलू और राम किरण उर्फ सावन के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। आरोपियों ने राजेंद्र को जंगल में ले जाकर शराब पिलाई और फिर गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद पहचान छिपाने के लिए शव को जला दिया।
मामले में पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी वीरसेन की मौत हो गई। शेष दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलता रहा। अदालत ने तीन दिन पहले दोनों को दोषी करार दिया था और शनिवार को सजा सुनाई।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों के भीतर कोई पछतावा नजर नहीं आया। हत्या के बाद भी उनका गुस्सा शांत नहीं हुआ और उन्होंने शव को जलाकर अपनी क्रूर मानसिकता का परिचय दिया। अदालत ने माना कि यह सुनियोजित, निर्मम और जघन्य अपराध है, इसलिए दोषियों को मृत्युदंड दिया जाना उचित है।
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