मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कानपुर में प्राकृतिक खेती कार्यशाला के दौरान गोवंश संरक्षण और प्राकृतिक खेती को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि लोग खेती और पशुपालन से दूरी बनाकर शॉर्टकट के रास्ते पर चल पड़े हैं। गाय का दूध लेने के बाद उसे सड़कों पर छोड़ दिया जाता है और जब वही गोवंश फसलों को नुकसान पहुंचाता है तो दोष सरकार को दिया जाता है।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) में आयोजित कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि गोवंश भारतीय संस्कृति और आस्था का केंद्र है। सरकार का संकल्प है कि गोवंश की तस्करी और अवैध कटान नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 7700 से अधिक गोशालाओं में करीब 14 लाख गोवंश संरक्षित हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सहभागिता योजना के तहत गोवंश पालने वाले किसानों को प्रति पशु 1500 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक और गो-आधारित खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे खेती की लागत घटेगी और आय बढ़ेगी।
योगी ने कहा कि 2014 से पहले किसान आर्थिक संकट और कम आय के कारण परेशान थे, लेकिन केंद्र सरकार की योजनाओं ने उनकी स्थिति में सुधार किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य, फसल बीमा, किसान सम्मान निधि और सिंचाई जैसी सुविधाएं मिलने का जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने रासायनिक खेती पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि केमिकल आधारित खेती से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। किडनी, लीवर और डायबिटीज जैसी बीमारियों के बढ़ते मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने प्राकृतिक खेती को भविष्य की जरूरत बताया।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से किसानों की प्रति एकड़ लागत में 10 से 12 हजार रुपये तक की बचत हो सकती है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा और इलाज पर होने वाला खर्च कम होगा।
सीएम योगी ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब किसान, युवा, व्यापारी और कारीगर सभी समृद्ध होंगे। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती के अभियान से जुड़ने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
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