दिल्ली में शिवसेना (UBT) की संसदीय दल की बैठक में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से केवल 3 सांसद—अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे—बैठक में शामिल हुए। बैठक में अनुपस्थित रहने वाले 6 सांसदों को पार्टी ने नोटिस जारी करने का फैसला किया है।
बैठक के बाद सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि पार्टी व्हिप जारी किया गया था, इसके बावजूद जो सांसद नहीं पहुंचे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं राज्यसभा सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया कि पार्टी के सांसदों को दबाव में रखा गया है। उन्होंने कहा कि जो बैठक में शामिल हुए, वे पार्टी के साथ हैं और जो नहीं आए, उन्होंने अलग रास्ता चुना है।
इस बीच गृह मंत्रालय ने महाराष्ट्र पुलिस को बागी माने जा रहे 6 सांसदों की सुरक्षा बढ़ाकर Y+ श्रेणी करने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजकर एकनाथ शिंदे गुट में विलय की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि 9 में से 6 सांसद एक साथ अलग गुट बनाते हैं, तो दल-बदल कानून के तहत उन्हें अयोग्यता से राहत मिल सकती है। इसी वजह से शिवसेना (UBT) में यह घटनाक्रम राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गौरतलब है कि जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों की बगावत के बाद शिवसेना में यह दूसरी बड़ी टूट मानी जा रही है। विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों की नजर अब इस घटनाक्रम के अगले राजनीतिक असर पर टिकी हुई है।
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