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CRPF कांस्टेबल भर्ती घोटाले में पूर्व DIG समेत 3 दोषी

लखनऊ की CBI कोर्ट (वेस्ट) ने CRPF कांस्टेबल भर्ती घोटाले में पूर्व DIG समेत तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। इन्हें तीन साल की सजा के साथ कुल 1.20 लाख रुपए का जुर्माना भरना होगा।

15 साल तक चले इस मामले में कोर्ट ने पूर्व DIG विनोद कुमार शर्मा, CRPF कर्मी सत्यवीर सिंह और तीरथ पाल चतुर्वेदी को दोषी पाया। तीनों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार किया था।

2009 में दर्ज हुआ था केस

यह मामला CRPF में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) भर्ती के दौरान घूसखोरी और अनियमितताओं से जुड़ा हुआ था, जिसमें चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगे थे। CBI ने इस मामले को 23 फरवरी 2009 को सोर्स इनपुट के आधार पर दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि आरोपी अधिकारियों ने भर्ती में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों से पैसे लिए थे।

भर्ती की गोपनीय जानकारी लीक कर वसूली

जांच में यह भी सामने आया कि विनोद कुमार शर्मा ने भर्ती से जुड़ी गोपनीय जानकारी, जैसे भर्ती का शेड्यूल और खाली पदों का विवरण, बिचौलियों को पहले ही उपलब्ध करा दिया था। इसके बाद यही बिचौलिये अभ्यर्थियों को चयन का झांसा देकर मोटी रकम वसूलते थे। इस पूरे नेटवर्क के जरिए भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।

2010 और 2012 में दाखिल हुई चार्जशीट

CBI ने जांच पूरी करने के बाद आरोपियों के खिलाफ 23 नवंबर 2010 और 16 जुलाई 2012 को चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद मामले में लंबी सुनवाई चली और गवाहों व साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने फैसला सुनाया।

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