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Scholars at Risk Report: भारत की अकादमिक आजादी पर चिंता, विश्वविद्यालयों को लेकर रिपोर्ट में क्या कहा गया?

अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क ‘स्कॉलर्स एट रिस्क’ (Scholars at Risk) की रिपोर्ट में भारत में अकादमिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षा संस्थानों के कामकाज, विश्वविद्यालयों में नेतृत्व की नियुक्तियों और छात्रों की अभिव्यक्ति व विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों में कई तरह की पाबंदियों का उल्लेख किया गया है।

‘फ्री टू थिंक 2026’ रिपोर्ट में क्या कहा गया?

‘फ्री टू थिंक 2026’ नाम की रिपोर्ट में 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2026 के बीच 59 देशों और क्षेत्रों में उच्च शिक्षा से जुड़े लोगों और संस्थानों पर हुए 382 हमलों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई सरकारों पर असहमति की आवाजों को दबाने और उच्च शिक्षा संस्थानों में राजनीतिक रूप से आज्ञाकारी माहौल बनाने के अभियान चलाने के आरोप लगाए गए हैं।

भारत को ‘बहुत ज्यादा सीमित’ श्रेणी में रखा

रिपोर्ट में 2026 के Academic Freedom Index (AFI) के आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें पिछले 10 वर्षों के दौरान 179 देशों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 50 देशों में अकादमिक स्वतंत्रता में उल्लेखनीय गिरावट आई, जबकि नौ देशों में सुधार दर्ज किया गया।

AFI में हांगकांग, भारत, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, वेस्ट बैंक और यूक्रेन को ‘बहुत ज्यादा सीमित’ श्रेणी में रखा गया है। वहीं अफगानिस्तान, चीन, ईरान, रूस, तुर्की, सीरिया, वेनेजुएला, जिम्बाब्वे और गाजा को ‘पूरी तरह से सीमित’ श्रेणी में शामिल किया गया है।

विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ने का दावा

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में केंद्र सरकार का उच्च शिक्षा पर नियंत्रण बढ़ा है। इसके चलते विश्वविद्यालयों के कामकाज, नेतृत्व की नियुक्तियों और अकादमिक प्राथमिकताओं पर प्रभाव पड़ने की बात कही गई है।

रिपोर्ट में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फैकल्टी सदस्यों को हटाने, अकादमिक कार्यक्रम रद्द करने और छात्रों की अभिव्यक्ति को सीमित करने वाली नीतियों का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा कैंपस में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हिंसा के मामलों का जिक्र किया गया है।

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि सत्तारूढ़ भाजपा ने उच्च शिक्षा पर सरकारी प्रभाव के माध्यम के तौर पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) का इस्तेमाल जारी रखा। UGC की कुछ नीतियों को लेकर भी रिपोर्ट में आलोचना का उल्लेख है।

भारत के AFI स्कोर में गिरावट का उल्लेख

रिपोर्ट में दिए AFI आंकड़ों के मुताबिक भारत का स्कोर 2022 में 0.38 था, जो 2025 में घटकर 0.14 रह गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि अकादमिक स्वतंत्रता में गिरावट भारत तक सीमित नहीं है और पिछले दशक में 179 में से 50 देशों में इस तरह की गिरावट दर्ज की गई।

प्रोफेसरों पर कार्रवाई के मामलों का भी जिक्र

रिपोर्ट में अकादमिक क्षेत्र में असहमति से जुड़े कुछ मामलों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्नेहाशीष भट्टाचार्य को 2025 में नौकरी से हटाए जाने का मामला शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने 14 अन्य फैकल्टी सदस्यों के साथ नवंबर 2022 में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से निपटने के विश्वविद्यालय के तरीके पर चिंता जताने वाले पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।

इसके अलावा रिपोर्ट में तमिलनाडु के SRM इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर लोरा संथाकुमार का मामला भी दर्ज है। रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2025 में पाकिस्तान में भारतीय सैन्य कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पोस्ट करने के बाद उन्हें निलंबित किया गया और बाद में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।

छात्रों के प्रदर्शन और अकादमिक फैसलों पर भी सवाल

रिपोर्ट में कहा गया है कि नीतिगत बदलावों, अकादमिक फैसलों और राष्ट्रीय पहचान, जाति, धर्म तथा ऐतिहासिक व्याख्याओं से जुड़े मुद्दों पर छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन किए। कुछ मामलों में विरोधी छात्र गुटों के बीच झड़पों का भी उल्लेख है।

रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों के कुछ कदमों से रिसर्च, टीचिंग और पब्लिकेशन की स्वतंत्रता सीमित होने की बात कही गई है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च 2026 के एक फैसले का भी उल्लेख है, जिसमें तीन शिक्षाविदों पर सरकारी फंडिंग प्राप्त करने पर आजीवन प्रतिबंध लगाए जाने की बात कही गई है।

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