प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात के दौरान भारत की चिंताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है।
भारत सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। उन्होंने आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के सिद्धांतों के आधार पर द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की बात कही।
सीमा पर शांति को बताया जरूरी आधार
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग के साथ बातचीत में सीमा पर शांति और स्थिरता को दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने की आवश्यक शर्त बताया।
उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं का सम्मान और संवेदनशीलता के साथ ध्यान रखना चाहिए।
तिब्बत और ताइवान पर भारत की नीति में बदलाव नहीं
चीनी पक्ष की ओर से जारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। भारत अपनी जमीन पर किसी को भी चीन विरोधी गतिविधियां संचालित करने की अनुमति नहीं देता।
हालांकि, भारत की ओर से जारी आधिकारिक बयान में तिब्बत या ताइवान का उल्लेख नहीं किया गया।
भारत ने स्वतंत्र विदेश नीति पर भी दिया जोर
चीनी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है और चीन के प्रति भारत के दृष्टिकोण का किसी तीसरे देश से कोई संबंध नहीं है।
पहले भी उठ चुका है सीमा और संप्रभुता का मुद्दा
जुलाई में मनीला में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की मुलाकात के बाद भी चीन की ओर से भारत के रुख को लेकर बयान जारी किया गया था। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि जयशंकर ने बातचीत में भारत की चिंताओं से जुड़े मुद्दों को चीन के सामने उठाने की बात कही थी।
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