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धनराज नथवानी के नाम से गरमाई यूपी की सियासत, राज्यसभा चुनाव में वोटों की गणित पर सबकी नजर

उद्योगपति धनराज नथवानी को लेकर उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में सियासी हलचल बढ़ गई है। समाजवादी पार्टी की ओर से उन्हें प्रत्याशी बनाए जाने के बाद चुनावी समीकरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी की नजर एनडीए में शामिल सहयोगी दलों के उन विधायकों पर भी है, जिनके पहले सपा से राजनीतिक संबंध रहे हैं।

सपा ने अभी अपने तीसरे प्रत्याशी को लेकर पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। ऐसे में भाजपा के सामने अपने एनडीए सहयोगियों के विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती बताई जा रही है। चुनाव में यदि 11वां प्रत्याशी मैदान में आता है तो मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।

क्रॉस वोटिंग की आशंका पर चर्चा

उत्तर प्रदेश के पिछले राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग के मामले सामने आए हैं। 2024 के चुनाव में सपा के कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग मतदान किया था। इस बार सपा की नजर एनडीए के सहयोगी दलों के कुछ विधायकों पर है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सुभासपा, निषाद पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल में ऐसे विधायक हैं, जो पहले किसी न किसी रूप में सपा से जुड़े रहे हैं। सपा की ओर से इन विधायकों से समर्थन हासिल करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि मतदान के दौरान कौन किसके पक्ष में वोट करेगा।

वोटों के प्रबंधन पर रहेगा जोर

राज्यसभा चुनाव में पहली और दूसरी वरीयता के वोटों का प्रबंधन महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में प्रत्याशियों के समर्थन में उपलब्ध वोटों की गणित और दूसरी वरीयता के वोटों का आवंटन चुनाव के नतीजे को प्रभावित कर सकता है।

सपा को उम्मीद है कि धनराज नथवानी की उम्मीदवारी के जरिए अतिरिक्त समर्थन जुटाया जा सकेगा। वहीं भाजपा के लिए भी अपने सहयोगी दलों और विधायकों को साथ बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।

पिछले चुनाव का भी दिया जा रहा उदाहरण

राज्यसभा के पिछले चुनाव का उदाहरण भी इस सियासी गणित में दिया जा रहा है। उस चुनाव में भाजपा के संजय सेठ की जीत के पीछे सपा के कुछ विधायकों की क्रॉस वोटिंग को एक महत्वपूर्ण factor बताया गया था।

सपा इससे पहले 2004 में उद्योगपति अनिल अंबानी को भी राज्यसभा भेज चुकी है। उस समय अनिल अंबानी की कंपनी उत्तर प्रदेश के दादरी में एक बड़ी परियोजना पर काम कर रही थी। बाद में उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

नथवानी की उम्मीदवारी पर विपक्षी दलों के सवाल

धनराज नथवानी को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद सपा विपक्षी दलों के निशाने पर भी आई है। सुभासपा और एआईएमआईएम ने इस फैसले को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है।

फिलहाल राज्यसभा चुनाव में सपा और भाजपा दोनों के सामने अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती है। चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ यह साफ होगा कि धनराज नथवानी की उम्मीदवारी से वोटों की गणित किस तरह प्रभावित होती है।

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