अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की विस्तृत रिपोर्ट तैयार हो गई है और इसे जल्द ही राज्य सरकार को सौंपा जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, जांच में भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में की गई ढील को चोरी की प्रमुख वजह माना गया है। रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की आपराधिक साजिश में भूमिका का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन मंदिर प्रबंधन में लापरवाही और निगरानी की कमी की ओर संकेत किया गया है।
भर्ती प्रक्रिया और SOP में ढील पर सवाल
सूत्रों के मुताबिक, जांच में सामने आया कि जिन कर्मचारियों पर चढ़ावे की चोरी के आरोप लगे, वे आउटसोर्स व्यवस्था के तहत नियुक्त हाउसकीपिंग कर्मी थे, जिन्हें चढ़ावे की गणना जैसे संवेदनशील कार्यों में लगाया गया था। एसआईटी ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और SOP को कमजोर किए जाने को चोरी की बड़ी वजह बताया है।
अनिल मिश्रा की भूमिका पर भी टिप्पणी
जांच में भर्ती प्रक्रिया और नियमों में बदलाव को लेकर ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका का भी परीक्षण किया गया। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में इस संबंध में अनिल मिश्रा की जिम्मेदारी अधिक बताई गई है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर रहेगा।
चंपत राय को नहीं मिली पूरी राहत
सूत्रों का कहना है कि विस्तृत जांच में चंपत राय को पूरी तरह क्लीन चिट नहीं दी गई है। रिपोर्ट में उन्हें मंदिर प्रबंधन की निगरानी में लापरवाही के लिए जिम्मेदार माना गया है, क्योंकि उस समय प्रशासनिक व्यवस्था उनके जिम्मे थी। हालांकि उनके खिलाफ किसी आपराधिक साजिश का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। पुलिस की विवेचना अभी जारी है।
टिन्नू यादव की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच में टिन्नू यादव की भूमिका भी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, भले ही वह ट्रस्ट के आधिकारिक प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा नहीं था, लेकिन उसे मंदिर प्रबंधन से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच थी। जांच में यह भी उल्लेख है कि उसके पास हुंडियों की चाबियां रहती थीं और कई महत्वपूर्ण कार्यों में उसकी सक्रिय भूमिका थी।
एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
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