भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा वितरण व्यवस्था में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। नियामक ने 24 सितंबर 2026 को ‘रीकैलिब्रेटिंग इकोनॉमिक्स ऑफ इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन’ शीर्षक से सार्वजनिक परामर्श पत्र जारी किया। प्रस्ताव का उद्देश्य बीमा वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने, मिस-सेलिंग पर रोक लगाने और कंपनियों के प्रबंधन खर्च को नियंत्रित करना है।
कमीशन की जानकारी सार्वजनिक करने का प्रस्ताव
प्रस्तावित नियमों के तहत बीमा कंपनियों और बड़े वितरण संस्थानों को अपनी कमीशन नीतियों और संरचनाओं की जानकारी सरल तरीके से सार्वजनिक करनी होगी। कुछ वाणिज्यिक पॉलिसियों में कमीशन का स्पष्ट खुलासा करने का भी प्रस्ताव है। इससे ग्राहकों को पॉलिसी की लागत में शामिल वितरण खर्च की जानकारी मिल सकेगी।
मिस-सेलिंग रोकने के लिए कड़े प्रावधान
IRDAI ने बीमा की गलत बिक्री रोकने के लिए कई उपाय प्रस्तावित किए हैं। बीमा बेचते समय ग्राहक की जरूरत और उसके लिए पॉलिसी की उपयुक्तता का दस्तावेज तैयार करना जरूरी किया जा सकता है।
इसके अलावा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मिलने वाले पारिश्रमिक को कमीशन की नियामकीय परिभाषा में शामिल करने का प्रस्ताव है।
बैंक और NBFC कर्मचारियों के इंसेंटिव पर रोक
प्रस्ताव में बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के कर्मचारियों को बीमा बिक्री के लिए वॉल्यूम या रिवॉर्ड से जुड़े इंसेंटिव देने पर रोक लगाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य बिक्री के दबाव में ग्राहकों को अनावश्यक बीमा उत्पाद बेचने की संभावनाओं को कम करना है।
प्रत्येक पॉलिसी के साथ व्यक्तिगत विक्रेता की पहचान जोड़ने और मिस-सेलिंग की घटनाओं को सार्वजनिक करने का भी प्रस्ताव है। गलत बिक्री साबित होने पर दिए गए कमीशन की वापसी यानी क्लॉ-बैक का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है।
कंपनियों के प्रबंधन खर्च पर भी प्रस्ताव
IRDAI ने बीमा कंपनियों के Expense of Management (EoM) की सीमा में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। जीवन बीमा कंपनियों के लिए EoM सीमा को कंपनी स्तर पर ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम इनकम (GDPI) से जोड़ने और इसे दो साल में 15 प्रतिशत तथा पांच साल में 12.5 प्रतिशत तक लाने का प्रस्ताव है।
सामान्य बीमा कंपनियों के लिए गणना का आधार ग्रॉस रिटेन प्रीमियम (GWP) से बदलकर घरेलू GDPI करने का प्रस्ताव है। पांच साल में EoM सीमा को GWP के 30 प्रतिशत से घटाकर GDPI के 20 प्रतिशत तक लाने की बात कही गई है।
क्या ग्राहकों को मिलेगी राहत?
प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में ग्राहकों को बीमा उत्पादों की कीमत और कमीशन से जुड़ी जानकारी अधिक स्पष्ट रूप से मिल सकती है। मिस-सेलिंग पर निगरानी बढ़ने से गलत तरीके से पॉलिसी बेचने की शिकायतों पर कार्रवाई का दायरा भी बढ़ सकता है।
हालांकि, ये अभी प्रस्तावित बदलाव हैं। सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया के दौरान उद्योग और अन्य हितधारकों से सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद अंतिम नियम तय किए जाएंगे।
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