15 अगस्त 2026 को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। देश को आजादी मिले 79 वर्ष पूरे हो चुके हैं। 1947 में गरीबी, कम साक्षरता, कमजोर स्वास्थ्य सुविधाओं और सीमित औद्योगिक एवं तकनीकी संसाधनों से जूझ रहे भारत ने इन वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, आय, शहरीकरण और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में लंबा सफर तय किया है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी भारत ने चंद्रमा और मंगल तक पहुंचकर दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। आइए आंकड़ों के जरिए जानते हैं कि आजादी के बाद भारत कितना बदला।
36 करोड़ की आबादी से करीब 148 करोड़ तक
1951 की पहली जनगणना के समय भारत की आबादी करीब 36.11 करोड़ थी। आज देश की आबादी करीब 148 करोड़ के आसपास पहुंच चुकी है। आबादी बढ़ने के साथ भारत की अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं का दायरा भी काफी बढ़ा है।
साक्षरता में बड़ा बदलाव
आजादी के शुरुआती दौर में भारत की साक्षरता दर बेहद कम थी। 1951 में यह करीब 18.3 प्रतिशत थी। महिलाओं की साक्षरता दर इससे भी काफी कम थी।
अब तस्वीर काफी बदल चुकी है। पीएलएफएस 2025 के अनुसार, सात वर्ष और उससे अधिक उम्र की आबादी में देश की साक्षरता दर 80.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। महिलाओं की साक्षरता दर भी करीब 74.9 प्रतिशत है। यानी शिक्षा के क्षेत्र में भारत ने पिछले कई दशकों में बड़ी प्रगति की है।
प्रति व्यक्ति आय में कई गुना बढ़ोतरी
1950-51 में भारत की प्रति व्यक्ति आय मौजूदा कीमतों पर करीब 265 रुपये सालाना थी। 2025-26 में प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय बढ़कर करीब 2.08 लाख रुपये सालाना हो गई। इससे भारत में आय और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार का अंदाजा लगाया जा सकता है।
गरीबी में आई बड़ी गिरावट
आजादी के बाद भारत के सामने गरीबी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक थी। 1973-74 में देश की करीब 54.9 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे थी।
हाल के वर्षों में गरीबी में उल्लेखनीय कमी आई है। विश्व बैंक के नए अनुमानों के मुताबिक, 2023-24 में 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा के आधार पर भारत की करीब 16.1 प्रतिशत आबादी गरीबी के दायरे में थी। अत्यधिक गरीबी में रहने वाली आबादी का हिस्सा करीब 2.6 प्रतिशत आंका गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं में भी बड़ा सुधार
आजादी के समय भारत में औसत जीवन प्रत्याशा करीब 32 वर्ष थी। 2020-24 के आंकड़ों में यह बढ़कर करीब 70.8 वर्ष हो गई है। पुरुषों की जीवन प्रत्याशा करीब 68.7 वर्ष और महिलाओं की 72.8 वर्ष रही।
शिशु मृत्यु दर में भी बड़ी गिरावट आई है। 1950 के दशक में जहां प्रति 1,000 जीवित जन्म पर शिशु मृत्यु दर 100 से अधिक थी, वहीं हाल के आंकड़ों में यह घटकर करीब 25 प्रति 1,000 जीवित जन्म रह गई है।
बिजली से रोशनी और डिजिटल क्रांति तक
1950-51 में भारत का कुल बिजली उत्पादन करीब 6.6 अरब यूनिट था। आज देश का बिजली उत्पादन बढ़कर हजारों अरब यूनिट के स्तर पर पहुंच चुका है। बिजली की पहुंच बढ़ने के साथ गांवों, शहरों, उद्योगों और घरों में जीवनशैली भी बदली है।
इसके बाद देश ने डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी तेज छलांग लगाई। ट्राई के मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार भारत में 114 करोड़ से अधिक वायरलेस मोबाइल कनेक्शन और 109 करोड़ से अधिक इंटरनेट ग्राहक थे।
गांवों से शहरों की ओर बढ़ता भारत
1951 में भारत की करीब 17.3 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती थी। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार 2025 में देश की शहरी आबादी का हिस्सा बढ़कर करीब 35.7 प्रतिशत हो गया। बढ़ता शहरीकरण भारत की बदलती अर्थव्यवस्था और रोजगार के स्वरूप को भी दर्शाता है।
अंतरिक्ष के क्षेत्र में दुनिया को चौंकाया
भारत की विकास यात्रा केवल अर्थव्यवस्था और सामाजिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। अंतरिक्ष विज्ञान में भी देश ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं।
चंद्रयान-1 से चांद पर पानी के संकेत
2008 में लॉन्च हुआ चंद्रयान-1 भारत का पहला चंद्र मिशन था। इस मिशन ने चंद्रमा की सतह पर हाइड्रॉक्सिल और पानी के अणुओं की मौजूदगी के प्रमाण जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक लैंडिंग
2023 में चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग की। इसके साथ भारत ऐसा करने वाला पहला देश बना और उसने चंद्र सतह पर रोवर संचालन की क्षमता भी प्रदर्शित की।
मंगलयान से मंगल तक पहुंचा भारत
2013 में लॉन्च हुआ भारत का मंगलयान 2014 में मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचा। भारत अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा तक पहुंचने वाला देश बना। यह मिशन भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।
अंतरिक्ष डॉकिंग में भी उपलब्धि
स्पैडेक्स मिशन के जरिए भारत ने अंतरिक्ष में दो उपग्रहों की डॉकिंग और अनडॉकिंग की तकनीक का सफल प्रदर्शन किया। इससे भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास यह तकनीकी क्षमता है।
सूर्य के अध्ययन के लिए आदित्य-एल1
भारत ने 2023 में आदित्य-एल1 मिशन लॉन्च किया। यह सूर्य के अध्ययन के लिए भारत का पहला समर्पित अंतरिक्ष मिशन है और अंतरिक्ष विज्ञान में देश की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है।
परमाणु और सौर ऊर्जा में भी बढ़ी ताकत
ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत ने पिछले दशकों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के साथ देश ने सौर ऊर्जा क्षमता में भी तेजी से विस्तार किया है। स्वदेशी तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा पर बढ़ता जोर भारत की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
डिजिटल इंडिया से वैश्विक पहचान
आज भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था दुनिया में चर्चा का विषय है। मोबाइल इंटरनेट, डिजिटल भुगतान और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने आम लोगों के लिए बैंकिंग, भुगतान और सरकारी सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाया है।
79 साल की यात्रा में बदली भारत की तस्वीर
1947 का भारत और 2026 का भारत कई मायनों में अलग दिखाई देता है। जहां आजादी के समय देश गरीबी, कम साक्षरता, खाद्य संकट और सीमित औद्योगिक क्षमता जैसी चुनौतियों से जूझ रहा था, वहीं आज भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक, परमाणु ऊर्जा तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमता दिखा रहा है।
हालांकि विकास की इस यात्रा के बावजूद रोजगार, आय असमानता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और क्षेत्रीय असंतुलन जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। इसलिए आजादी के 79 वर्षों की यह यात्रा उपलब्धियों के साथ-साथ आने वाले वर्षों की जिम्मेदारियों को भी सामने रखती है।
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