चीन में आर्थिक दबाव, बेरोजगारी और कठिन कामकाजी हालात का असर अब गिग वर्कर्स और मजदूरों की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। फूड डिलीवरी, कूरियर और फैक्ट्री में काम करने वाले श्रमिक दिन-रात मेहनत करने के बावजूद परिवार की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं। अब उनका यही संघर्ष कविताओं और किताबों के जरिए सामने आ रहा है।
फूड डिलीवरी का काम कर चुके वांग जिबिंग की कविताओं में मजदूरों की इसी मुश्किल जिंदगी की तस्वीर दिखाई देती है। उनकी रचनाओं में ऐसे कर्मचारियों का जिक्र है, जो परिवार से दूर रहकर लगातार काम करते हैं, लेकिन फिर भी आर्थिक परेशानियों से बाहर नहीं निकल पाते। कई प्रवासी मजदूरों और गिग वर्कर्स की जिंदगी भी इसी तरह की चुनौतियों से गुजर रही है।
वहीं, कूरियर कर्मचारी समेत कई अलग-अलग नौकरियां कर चुके हू अनयान ने अपने कामकाजी अनुभवों को निबंधों के रूप में लिखा। बाद में इन्हीं अनुभवों पर आधारित उनकी किताब प्रकाशित हुई, जिसे पाठकों के बीच काफी लोकप्रियता मिली।
चीन में श्रमिकों की ओर से लिखी जा रही कविताओं और किताबों को युवाओं और आम लोगों के बीच भी पसंद किया जा रहा है। इन रचनाओं में बेरोजगारी, कम आमदनी, काम की असुरक्षा, थकान और बेहतर जिंदगी की कमजोर पड़ती उम्मीदों को सामने लाया जा रहा है।
वांग जिबिंग के कविता संग्रह ‘लो फ्लाइट’ को प्रतिष्ठित लू शुन साहित्यिक पुरस्कार भी मिल चुका है। ऐसे में चीन में उभरता श्रम साहित्य अब सिर्फ साहित्य तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश के गिग वर्कर्स और मजदूरों की वास्तविक जिंदगी और आर्थिक चुनौतियों की कहानी भी बयां कर रहा है।
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