जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी प्रदर्शन की जांच में दिल्ली पुलिस के फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच के दौरान सिस्टम ने कुल 2,873 लोगों की पहचान की, जिनमें से 989 व्यक्तियों का आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती, दुष्कर्म, पॉक्सो, हथियार अधिनियम और एनडीपीएस एक्ट जैसे गंभीर मामलों के आरोपी भी शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, मौजूदा समय में एफआरएस की पहचान क्षमता करीब 15 से 20 प्रतिशत है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि प्रदर्शन में मौजूद आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों का केवल एक हिस्सा ही सिस्टम की पकड़ में आ सका है। अधिकारियों का कहना है कि कैमरे की गुणवत्ता, रोशनी, चेहरे का कोण और सॉफ्टवेयर का एल्गोरिदम जैसे तकनीकी पहलू इसकी सटीकता को प्रभावित करते हैं।
जांच के मुताबिक, चिन्हित 989 लोगों में 101 हत्या के आरोपी, 62 हत्या के प्रयास के आरोपी, 284 लूट और डकैती से जुड़े आरोपी, 61 दुष्कर्म के आरोपी, 6 पॉक्सो एक्ट के आरोपी और 25 महिलाओं से छेड़छाड़ के मामलों में आरोपी शामिल हैं। इसके अलावा 229 हथियार अधिनियम, 135 झपटमारी, 19 अपहरण और 67 एनडीपीएस एक्ट से जुड़े आरोपी भी पहचाने गए हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई आरोपी एक से अधिक गंभीर मामलों में शामिल रहे हैं। हत्या के मामलों में 142 आरोपी ऐसे मिले जिनके खिलाफ दो या उससे अधिक मामले दर्ज हैं, जबकि 12 आरोपियों पर 10 या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज पाए गए। लूट और डकैती के मामलों में भी कई आदतन अपराधियों की पहचान हुई, जिनमें 31 लोगों पर 10 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि एफआरएस का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति को स्वतः अपराधी घोषित करना नहीं है। यह तकनीक केवल पहले से दर्ज आपराधिक रिकॉर्ड वाले संदिग्धों की पहचान कर जांच एजेंसियों की सहायता के लिए इस्तेमाल की जाती है। पुलिस अब चिन्हित लोगों की भूमिका की अलग-अलग जांच कर रही है।
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