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गेहूं से चीनी तक महंगाई का खतरा! यूरोप की गर्मी ने मचाई तबाही, आगे और महंगा हो सकता है खाना

दुनिया में खाद्य कीमतों पर अब युद्ध के साथ मौसम का संकट भी दबाव बढ़ा रहा है। यूरोप में जून की रिकॉर्ड गर्मी से गेहूं, जौ, मक्का और जई समेत करीब 90 लाख टन अनाज उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसी बीच संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) का वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक जुलाई में बढ़कर 131.1 अंक पहुंच गया, जो जनवरी 2023 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है।

यूरोप की भीषण गर्मी से फसलों को भारी नुकसान

जून 2026 पश्चिमी यूरोप के सबसे गर्म जून में शामिल रहा। फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों में रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया गया। लगातार कई दिनों तक 38 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान रहने से फसलों पर गंभीर असर पड़ा।

यूरोपीय अनाज व्यापारियों के संगठन के अनुमान के मुताबिक, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन का अनाज उत्पादन करीब 28.66 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले अनुमान से लगभग 90 लाख टन कम है।

गेहूं और मक्का की कीमतों में तेजी

FAO के जुलाई के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक अनाज मूल्य सूचकांक में एक महीने में 3.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। गेहूं की कीमतों में 5.8 फीसदी और मक्का की कीमतों में 3.6 फीसदी की तेजी दर्ज की गई।

गेहूं की कीमतों पर रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण काला सागर क्षेत्र से निर्यात में संभावित व्यवधान और गर्मी से फसलों को हुए नुकसान की आशंका का असर पड़ा है। अमेरिका के कुछ हिस्सों में गर्म और शुष्क मौसम की चिंता ने भी मक्का की कीमतों को प्रभावित किया।

चीनी और खाद्य तेल भी हुए महंगे

खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ अनाज तक सीमित नहीं रही। जुलाई में वैश्विक चीनी कीमतों में 5.6 फीसदी और वनस्पति तेलों की कीमतों में 2 फीसदी की वृद्धि हुई। वनस्पति तेलों का सूचकांक जून 2022 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

हालांकि, मांस और डेयरी उत्पादों की कीमतों में गिरावट ने कुल खाद्य महंगाई को कुछ हद तक संतुलित किया।

वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक तीन साल के उच्च स्तर पर

FAO का खाद्य मूल्य सूचकांक जुलाई में 131.1 अंक रहा, जो जून की तुलना में 0.6 फीसदी अधिक है और जनवरी 2023 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। मौसम संबंधी संकट, युद्ध और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव को खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है।

आगे और बढ़ सकती है खाद्य महंगाई की चिंता

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यूरोप और अन्य प्रमुख कृषि उत्पादक क्षेत्रों में गर्मी, सूखा और प्रतिकूल मौसम जारी रहा तो वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा युद्ध और व्यापार मार्गों में व्यवधान से परिवहन, ऊर्जा और कृषि लागत भी प्रभावित हो सकती है।

ऐसे में आने वाले महीनों में गेहूं, मक्का, चीनी और खाद्य तेल जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर दुनिया भर की नजर रहेगी। फिलहाल वैश्विक खाद्य बाजार में मौसम और भू-राजनीतिक संकट का दोहरा दबाव महंगाई की चिंता को बढ़ा रहा है।

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