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Crude Oil Import: रूस पर प्रतिबंधों के बीच भारत की तेल खरीद जारी, जुलाई में लगातार दूसरे महीने रिकॉर्ड आयात

रूस के ऊर्जा कारोबार पर पश्चिमी देशों का दबाव बढ़ने के बावजूद भारत ने जुलाई में रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के अनुसार, भारतीय कंपनियों ने जुलाई में 5.5 अरब यूरो मूल्य का रूसी कच्चा तेल खरीदा। यह जून की तुलना में 2.1 फीसदी अधिक है।

भारत के कुल तेल आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी बढ़ी

जुलाई में भारत की रूस से कुल जीवाश्म ईंधन खरीद में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 87 फीसदी रही। जून में यह हिस्सेदारी 83 फीसदी थी। जून में भारत ने रूस से करीब 4.5 अरब यूरो मूल्य का कच्चा तेल खरीदा था।

CREA के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में भारतीय रिफाइनरियों ने प्रतिदिन करीब 28 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल आयात किया। यह भारत के कुल पांच मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक कच्चे तेल आयात का करीब 55.5 फीसदी है।

2022 के बाद तेजी से बढ़ी रूसी तेल पर निर्भरता

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत की रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता तेजी से बढ़ी। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और यूरोपीय खरीदारों की दूरी के बीच रूस ने एशियाई रिफाइनरियों को छूट पर कच्चा तेल उपलब्ध कराया।

अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, 2021 में रूस भारत को प्रतिदिन एक लाख बैरल से भी कम कच्चा तेल देता था। यह भारत के कुल तेल आयात का करीब 2.5 फीसदी था। 2022 में यह बढ़कर करीब 7.40 लाख बैरल प्रतिदिन और 2023 में लगभग 18 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया।

रूस से तेल खरीद में चीन के बाद भारत दूसरे स्थान पर

यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूसी कच्चे तेल का दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। CREA के अनुसार, जुलाई में रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी करीब 37 फीसदी रही, जबकि चीन 50 फीसदी हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर रहा।

जुलाई में भारत ने रूस से कुल 6.4 अरब यूरो मूल्य के जीवाश्म ईंधन खरीदे। इसमें 5.5 अरब यूरो का कच्चा तेल, 51.2 करोड़ यूरो का कोयला और 34.1 करोड़ यूरो के तेल उत्पाद शामिल रहे।

यूराल्स तेल की कीमत 60.22 डॉलर प्रति बैरल

CREA के अनुसार, जुलाई में रूस के यूराल्स कच्चे तेल की औसत कीमत तीन फीसदी घटकर 60.22 डॉलर प्रति बैरल रही। हालांकि, यह फरवरी 2026 में लागू जी7 और यूरोपीय संघ की 44.10 डॉलर प्रति बैरल की मूल्य सीमा से काफी अधिक थी।

रूस की पाइपलाइन के जरिए कच्चे तेल से होने वाली आय में जुलाई में मासिक आधार पर 21 फीसदी की गिरावट आई। वहीं, समुद्री रास्ते से कच्चे तेल के निर्यात से होने वाली आय में सात फीसदी की बढ़ोतरी ने इस गिरावट की कुछ भरपाई की।

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