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CM रेखा गुप्ता का सख्त एक्शन: जसोला हादसे के बाद JE निलंबित, लापता बच्चे की तलाश जारी

जसोला में खुले नाले में गिरे 15 वर्षीय मिथुन का तीसरे दिन भी कोई सुराग नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सख्त रुख अपनाया है। हादसे पर दुख और नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री ने जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए और मुख्य सचिव को एक घंटे के भीतर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दिया। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद एमसीडी ने लाजपत नगर दक्षिण-पूर्वी जोन के जूनियर इंजीनियर अनुज कुमार को कथित लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

मिथुन शनिवार को कटी पतंग के पीछे भागते समय जसोला इलाके के एक खुले नाले में गिर गया था। हादसे के बाद से एनडीआरएफ समेत कई एजेंसियां लगातार उसकी तलाश में जुटी हैं, लेकिन सोमवार तक बच्चे का कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका। तेज पानी का बहाव और नाले के आसपास घनी झाड़ियां रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

सीएम के अल्टीमेटम के बाद कार्रवाई

घटना की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जनता की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्य सचिव को एक घंटे के भीतर जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

इसके बाद एमसीडी की ओर से कार्रवाई करते हुए लाजपत नगर दक्षिण-पूर्वी जोन के जेई अनुज कुमार को निलंबित कर दिया गया। निलंबन आदेश के अनुसार उनका मुख्यालय अधिशासी अभियंता कार्यालय रहेगा और वह सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना स्टेशन नहीं छोड़ सकेंगे।

तीसरे दिन भी जारी रहा रेस्क्यू ऑपरेशन

शनिवार को हुए हादसे के बाद शुरू हुआ बचाव अभियान सोमवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियों की टीमें नाले में बच्चे की तलाश करती रहीं। हालांकि तेज बहाव और आसपास की झाड़ियों के कारण रेस्क्यू टीमों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

मिथुन के परिजन अब भी उसके सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। बेटे का कोई पता नहीं चलने से परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिजनों ने रेस्क्यू अभियान की रफ्तार और व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

बेटे की तलाश में नाले में उतरे पिता

बेटे के न मिलने से परेशान मिथुन के पिता अवधेश खुद भी नाले के पानी में उतरकर उसकी तलाश करने की कोशिश कर चुके हैं। परिवार की इस बेबसी ने स्थानीय लोगों को भी भावुक कर दिया है। लोगों का कहना है कि जिस खुले नाले में बच्चा गिरा, उसकी सुरक्षा व्यवस्था पहले से बेहतर होती तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

हादसे के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी है। लोगों का सवाल है कि खुले और खतरनाक नालों को समय रहते सुरक्षित क्यों नहीं किया गया। इस घटना ने दिल्ली में खुले नालों की सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित विभागों की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब एक ओर मिथुन की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई शुरू हो गई है। बच्चे के मिलने को लेकर परिवार और स्थानीय लोग लगातार उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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