उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) राजनीतिक दलों के लिए बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य की मतदाता सूची से करीब 8.41 लाख नाम हटने की संभावना है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 10.56% है। ऐसे राज्य में, जहां कई विधानसभा सीटों पर हार-जीत का अंतर 1,000 से भी कम वोट रहा है, वहां यह बदलाव चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
निर्वाचन विभाग के मुताबिक, प्रदेश में कुल 79.60 लाख मतदाता हैं, जिनमें से 71.16 लाख गणना प्रपत्र डिजिटाइज किए जा चुके हैं। जबकि 8.41 लाख मतदाता ‘अनकलेक्टेबल’ श्रेणी में हैं। इनमें मृत, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके, अन्य स्थानों पर पहले से पंजीकृत और लंबे समय से अनुपस्थित मतदाता शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ों से मैदानी इलाकों की ओर पलायन और तेजी से बदलते डेमोग्राफिक पैटर्न का असर भी 2027 के चुनाव में देखने को मिल सकता है। धर्मपुर, रुद्रपुर, काशीपुर, कालाढूंगी और सहसपुर जैसे क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है, जबकि कई पर्वतीय सीटों पर वृद्धि सीमित रही है।
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह अंतिम मतदाता सूची नहीं है। 14 जुलाई को प्रारूप सूची प्रकाशित होगी, जिसके बाद 13 अगस्त तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। इनके निस्तारण के बाद 15 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। आयोग ने कहा है कि प्रत्येक पात्र मतदाता को नाम जुड़वाने, संशोधन कराने और आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अवसर मिलेगा।
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