अंकिता भंडारी मामले से जुड़े विवादित वीडियो प्रकरण में भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को बड़ी राहत मिली है। देहरादून की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत ने गुरुवार को उन्हें जमानत दे दी। राठौर को 15 जून को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था और उनकी पहली जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि मामले में जोड़ी गई बीएनएस की धारा 308(6) जमानती अपराध की श्रेणी में आती है। कोर्ट ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदार पेश करने की शर्त पर उनकी रिहाई के आदेश दिए हैं।
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि सुरेश राठौर जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और मामला मुख्य रूप से जमानती धाराओं से संबंधित है। वहीं अभियोजन पक्ष ने जांच जारी रहने का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया।
पूर्व विधायक को देहरादून पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने हरिद्वार के बुग्गावाला क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। उन पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम से जुड़े कथित ऑडियो-वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने का आरोप है।
पुलिस जांच के दौरान मामले में एक्सटॉरशन (वसूली) की धारा भी जोड़ी गई थी। पुलिस का दावा था कि आरोपी राजनीतिक लाभ और पार्टी में पुनः प्रभाव स्थापित करने के उद्देश्य से वीडियो प्रसारित कर रहे थे।
गौरतलब है कि यह विवाद अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित ‘वीआईपी एंगल’ को लेकर सामने आए वीडियो और बयानों के बाद चर्चा में आया था। मामले में पुलिस जांच अभी भी जारी है।
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