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उत्तराखंड के मदरसों के लिए राहत की खबर, मान्यता न मिलने पर आरटीई में व्यवस्था पर विचार

उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता का मामला अभी लंबित है। मदरसा बोर्ड से पंजीकृत 452 मदरसों में से 419 को अब तक शिक्षा विभाग से मान्यता नहीं मिल सकी है। विभाग ने मान्यता के लिए आवेदन की समयसीमा को लेकर मदरसों को फिलहाल राहत दी है।

31 अगस्त के बाद भी लिए जा सकेंगे आवेदन

शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार निजी स्कूलों की मान्यता के लिए एक अप्रैल से 31 जुलाई तक आवेदन करने पर निर्धारित शुल्क और एक अगस्त से 31 अगस्त तक विलंब शुल्क का प्रावधान है। 31 अगस्त के बाद ऑनलाइन मान्यता आवेदनों पर विचार नहीं किया जाता।

हालांकि, मदरसों के मामले में विभाग ने इस व्यवस्था में राहत दी है। अधिकारियों के मुताबिक, मदरसे पहले से संचालित हैं, इसलिए उनके मान्यता आवेदन 31 अगस्त के बाद भी लिए जा सकते हैं।

452 में से 419 मदरसे अभी मान्यता से बाहर

प्रदेश में मदरसा बोर्ड से 452 मदरसे पंजीकृत हैं। इनमें कुछ ने शिक्षा विभाग से मान्यता लेने के लिए आवेदन नहीं किया है, जबकि कुछ के आवेदन अभी लंबित हैं। शिक्षा विभाग निजी स्कूलों की तर्ज पर मदरसों को भी मान्यता देने की प्रक्रिया अपना रहा है।

देहरादून के मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जयसवाल के मुताबिक, जिले में निरीक्षण के बाद सात मदरसों को मान्यता दी जा चुकी है, जबकि कुछ अन्य मामलों पर अभी विचार चल रहा है।

शिक्षकों की दोहरी व्यवस्था बनी चुनौती

मदरसों की मान्यता में शिक्षकों की योग्यता भी एक बड़ी बाधा बन रही है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला कोषाध्यक्ष अब्दुल सत्तार के मुताबिक, पहले मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए मदरसा बोर्ड की डिग्री मान्य थी, लेकिन विद्यालयी शिक्षा के लिए अब डीएलएड, टीईटी और स्नातक जैसी योग्यताएं जरूरी हैं।

उनके अनुसार, धार्मिक शिक्षा और विद्यालयी शिक्षा के लिए अलग-अलग शिक्षकों की व्यवस्था करना मदरसों के लिए चुनौती बन रहा है।

कक्षाओं के लिए भी तय हैं मानक

मान्यता के लिए भवन से जुड़े मानक भी निर्धारित हैं। कक्षा पांचवीं तक की मान्यता के लिए कम से कम पांच कक्षा-कक्ष और एक अतिरिक्त कक्ष होना जरूरी है।

मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जयसवाल के अनुसार, मदरसों की मान्यता के लिए शिक्षकों का टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। कक्षा एक से पांच तक के लिए टीईटी प्रथम और कक्षा छह से आठ तक के लिए टीईटी द्वितीय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक की शैक्षिक योग्यता में छूट नहीं दी जा सकती।

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