Friday , November 6 2026
Breaking News

भारत में टिकाऊ बदलाव के लिए श्रमिकों की भागीदारी जरूरी, बोले वी. अनंत नागेश्वरन

मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि का लाभ श्रमिकों और कंपनियों के बीच निष्पक्ष रूप से साझा होना चाहिए। उनके मुताबिक, यही एक स्वस्थ और टिकाऊ बाजार अर्थव्यवस्था की जरूरी शर्त है। उन्होंने एआईएमए के एक कार्यक्रम में मुख्य भाषण के दौरान यह बात कही।

श्रमिकों और कारोबार के बीच संतुलन जरूरी

नागेश्वरन ने कहा कि निष्पक्षता की बहस को श्रमिकों और कारोबार के बीच किसी एक को चुनने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, पूंजी को उचित प्रतिफल मिलना चाहिए, वहीं श्रमिकों को अपने काम से पैदा होने वाली समृद्धि में सार्थक हिस्सा मिलना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि टिकाऊ बाजार व्यवस्था के लिए पर्याप्त क्रय शक्ति वाले उपभोक्ता जरूरी हैं। आखिरकार ये उपभोक्ता भी किसी न किसी रूप में श्रमिक ही होते हैं।

मजदूरी घटाकर मुनाफा बढ़ाना लंबे समय में नुकसानदेह

सीईए ने कहा कि पूंजी को उचित प्रतिफल मिलना चाहिए, लेकिन मजदूरी कम करके, आपूर्तिकर्ताओं के भुगतान में देरी करके और उस अंतर को मुनाफे में बदलना लंबे समय में आत्म-पराजय वाला तरीका हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था तब तक चल सकती है, जब तक उपभोक्ताओं की बचत खत्म नहीं हो जाती।

नागेश्वरन के मुताबिक, लागत कम करने का टिकाऊ तरीका वास्तविक लागत को घटाना है।

सरकार कारोबार की लागत कम करने पर दे ध्यान

सरकार की भूमिका पर सीईए ने कहा कि सस्ती बिजली और किफायती जमीन उपलब्ध कराने के साथ अनुपालन का बोझ कम करना जरूरी है। इससे कारोबार करने की लागत घटेगी और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सरकारें सीधे तौर पर स्थायी रोजगार पैदा नहीं करतीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को आसान बनाती हैं। कारोबारों की गतिविधियां ही रोजगार के अवसर पैदा करती हैं।

सिर्फ आर्थिक वृद्धि नहीं, उसका लाभ लोगों तक पहुंचना जरूरी

नागेश्वरन ने कहा कि भारत की आर्थिक चुनौती अब केवल तेज वृद्धि हासिल करना नहीं है। जरूरत इस बात की है कि आर्थिक वृद्धि आम भारतीयों के लिए बेहतर रोजगार, अधिक मजदूरी और ज्यादा आर्थिक सुरक्षा में बदले।

उन्होंने कहा कि देश को अब आर्थिक वृद्धि को वास्तविक ‘बदलाव’ में बदलने पर ध्यान देना चाहिए। स्रोत के अनुसार, मध्यम अवधि में भारत की वार्षिक आर्थिक वृद्धि का अनुमान करीब 6.5 से 7 फीसदी के बीच बताया जा रहा है। पश्चिम एशिया संकट की चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था ने पहली तिमाही में 7.8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की।

वृद्धि और बदलाव में क्या अंतर बताया?

सीईए ने कहा कि आर्थिक वृद्धि यह बताती है कि अर्थव्यवस्था हर साल कितनी बड़ी हो रही है, जबकि बदलाव इस बात से जुड़ा है कि उस वृद्धि का लाभ किसे मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि यह देखना जरूरी है कि कितने श्रमिक असुरक्षित रोजगार से उत्पादक और स्थिर रोजगार की ओर बढ़ रहे हैं और क्या परिवारों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार हो रहा है। नागेश्वरन के अनुसार, आर्थिक वृद्धि तभी व्यापक बदलाव में बदलती है, जब उसका लाभ निष्पक्ष रूप से साझा हो।

Check Also

भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार पड़ी धीमी, अक्तूबर में उत्पादन और नए ऑर्डर की वृद्धि घटी

भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि रफ्तार अक्तूबर में कुछ धीमी पड़ गई। उत्पादन और ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *