प्रतापगढ़ में वर्ष 2013 में मारे गए सीओ जियाउल हक के माता-पिता ने अपनी बहू डॉ. परवीन आजाद को लेकर अपनी पीड़ा जाहिर की है। उनका कहना है कि बेटे की मौत के बाद बहू ने ससुराल से दूरी बना ली और चल-अचल संपत्ति में हिस्से को लेकर अदालत में मुकदमा दाखिल किया।
जियाउल हक के पिता शमशुल हक और मां हाजरा खातून उम्रदराज हैं और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण चलने-फिरने में भी दिक्कत होती है। उनके मुताबिक, फिलहाल दूसरे बेटे शोहराब और उनकी पत्नी जैनब खातून उनकी देखभाल कर रहे हैं। शोहराब की तैनाती गोरखपुर एडीजी कार्यालय में बताई गई है और वह समय-समय पर घर आते हैं।
2019 में सिविल कोर्ट से खारिज हुआ था मामला
परिवार के मुताबिक, बहू परवीन आजाद ने संपत्ति में हिस्से को लेकर मुकदमा दाखिल किया था। वर्ष 2019 में सिविल कोर्ट से मामला खारिज होने के बाद उन्होंने जिला जज की अदालत में केस दाखिल किया। परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने लखनऊ जाकर मामले को आगे न बढ़ाने का अनुरोध किया तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट तक मामला ले जाने की बात कही गई।
परिवार का कहना है कि सितंबर में भी मामले की अलग-अलग तारीखें लगीं और अगली सुनवाई 28 सितंबर को निर्धारित है।
बेटे की शहादत के बाद बदले पारिवारिक रिश्ते
जियाउल हक के पिता शमशुल हक का कहना है कि उनके बेटे की शहादत के बाद बहू कुछ समय के लिए गांव आई थीं, लेकिन इसके बाद वह दोबारा गांव नहीं आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद से संपत्ति को लेकर कानूनी विवाद चलता रहा।
परिवार के मुताबिक, जियाउल हक की मौत के बाद उनके माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी उनके दूसरे बेटे शोहराब और उनकी पत्नी संभाल रहे हैं।
जियाउल हक हत्याकांड में दस दोषियों को उम्रकैद
सीओ जियाउल हक की हत्या 2 मार्च 2013 को प्रतापगढ़ के हथिगवां थाना क्षेत्र के बलीपुर में हुई थी। ग्राम प्रधान नन्हे यादव की हत्या के बाद तत्कालीन सीओ जियाउल हक मौके पर पहुंचे थे, जहां गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई।
इस मामले में लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने 9 अक्तूबर 2024 को दस आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी।
राजा भैया समेत पांच लोगों को कोर्ट से राहत
इसी मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने हाल ही में जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया समेत पांच लोगों के खिलाफ चल रही कार्यवाही समाप्त कर दी। अदालत ने पर्याप्त आधार न होने का हवाला दिया।
जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने पहले सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया था और राजा भैया समेत अन्य नामजद लोगों की भूमिका की दोबारा जांच की मांग की थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद सीबीआई ने अक्तूबर 2023 में दोबारा जांच शुरू की थी। इसके बाद दिसंबर 2023 में सीबीआई ने फिर क्लोजर रिपोर्ट अदालत में दाखिल कर दी थी।
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