अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म होने के बाद भी अमेरिका क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाए रख सकता है। ट्रंप ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका ईरान के तेल संसाधनों पर नियंत्रण भी कर सकता है और इसकी तुलना वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई के बाद अपनाए गए मॉडल से की।
ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका अंततः ईरान से बाहर निकल जाएगा, लेकिन अगर परिस्थितियां ऐसी बनीं तो वह वहां रुककर तेल संसाधनों में भूमिका निभा सकता है। उनके इस बयान पर फिलहाल ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मध्यावधि चुनाव के बाद युद्ध खत्म होने की उम्मीद
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान लगातार अमेरिका के संपर्क में है और समझौते की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि युद्ध नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद या संभवतः उससे पहले खत्म हो सकता है। हालांकि, ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका केवल अपनी शर्तों के मुताबिक होने वाले समझौते को ही स्वीकार करेगा।
तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार
ईरान संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध खत्म होते ही अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है।
वेनेजुएला मॉडल का दिया उदाहरण
ट्रंप की टिप्पणी को वेनेजुएला में अमेरिका की हालिया कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है। मादुरो को सत्ता से हटाए जाने के बाद अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ाई है। अब ट्रंप के ईरान को लेकर दिए बयान से सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका वहां भी तेल और ऊर्जा संसाधनों को लेकर इसी तरह की रणनीति अपना सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ट्रंप का बयान केवल दबाव बनाने की रणनीति है या अमेरिका वास्तव में ईरान के तेल संसाधनों में सीधे दखल की तैयारी कर रहा है।
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