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PwD छात्रों के लिए 5% आरक्षण कितना कारगर? मनमीत कौर ने बताईं शिक्षा व्यवस्था की बड़ी कमियां

उच्च शिक्षा संस्थानों में दिव्यांग छात्रों के लिए निर्धारित 5 फीसदी आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग उठी है। डिपार्टमेंट ऑफ एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज (DEPwD) की अतिरिक्त सचिव मनमीत कौर नंदा ने कहा कि आरक्षण का प्रावधान सिर्फ कागजों और नीतियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक लाभ छात्रों तक पहुंचना जरूरी है।

अशोका यूनिवर्सिटी के ऑफिस ऑफ लर्निंग सपोर्ट और इनक्लूसिव यूनिवर्सिटी अलायंस की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने समावेशी उच्च शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए छह सूत्रीय रोडमैप भी पेश किया।

इसमें संस्थानों की सुविधाओं और पहुंच का ऑडिट, 5 फीसदी आरक्षण का प्रभावी क्रियान्वयन, जरूरत के मुताबिक सुविधाएं, सहायक तकनीक और सहयोग व्यवस्था को मजबूत करना, शिक्षकों व प्रशासन को संवेदनशील बनाना और नियमित सामाजिक ऑडिट के जरिए जवाबदेही तय करना शामिल है।

नंदा ने कहा कि दिव्यांग छात्रों के लिए केवल इमारतों में रैंप बनाना पर्याप्त नहीं है। विश्वविद्यालयों की वेबसाइट, ऑनलाइन लर्निंग सिस्टम, परीक्षा पोर्टल और पाठ्यक्रम सामग्री को भी सुलभ बनाया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के अध्यक्ष प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने समावेशी शिक्षा को महानगरों तक सीमित न रखने की बात कही। उन्होंने टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहरों के साथ-साथ गांवों में दिव्यांग छात्रों की वास्तविक जरूरतों का आकलन करने पर जोर दिया।

वहीं, सहायक तकनीक के क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की भी बात कही गई। कार्यक्रम में नीति निर्माता, उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रतिनिधि और समावेशी शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए।

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