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Rahul Gandhi: संसद में अमित शाह पर टिप्पणी पड़ी भारी, विशेषाधिकार समिति ने भेजा नोटिस

लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित असंसदीय और आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भाजपा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर और संजय जायसवाल की शिकायतों के बाद लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी से इस मामले में जवाब मांगा है। उन्हें 28 अगस्त 2026 तक अपना पक्ष रखने को कहा गया है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद सार्वजनिक परीक्षाओं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर लोकसभा में हुई चर्चा के दौरान राहुल गांधी की ओर से अमित शाह के खिलाफ की गई टिप्पणियों से जुड़ा है।

भाजपा सांसदों ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने बहस के दौरान गृह मंत्री के खिलाफ असंसदीय और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। साथ ही, आरोप लगाया गया कि उन्होंने नियम 353 के तहत आवश्यक पूर्व सूचना दिए बिना अमित शाह के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए।

अनुराग ठाकुर ने 30 जुलाई को दी थी शिकायत

भाजपा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने 30 जुलाई को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था। इसमें आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने विधेयक पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जो संसदीय नियमों और सदन की मर्यादा के अनुरूप नहीं थी।

ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने अमित शाह के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए, लेकिन उनके लिए नियम 353 के तहत आवश्यक पूर्व सूचना नहीं दी गई थी।

संजय जायसवाल ने भी की कार्रवाई की मांग

भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने 29 जुलाई को अलग पत्र भेजकर राहुल गांधी की कथित टिप्पणियों पर संज्ञान लेने और संसदीय नियमों के तहत कार्रवाई की मांग की थी।

जायसवाल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने बहस के दौरान गृह मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने नियम 352 और 353 का हवाला देते हुए कहा कि सरकार की नीतियों की आलोचना संसदीय लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन व्यक्तिगत और असंसदीय टिप्पणियों की अनुमति नहीं दी जा सकती।

28 अगस्त तक देना होगा जवाब

लोकसभा सचिवालय की ओर से 14 अगस्त को जारी पत्र में राहुल गांधी से दोनों शिकायतों के संबंध में अपना जवाब या टिप्पणी 28 अगस्त तक देने को कहा गया है। इसके बाद उनका जवाब लोकसभा अध्यक्ष के विचार के लिए रखा जाएगा।

किन नियमों का दिया गया हवाला?

शिकायत में संसदीय कार्यवाही से जुड़े कई नियमों का उल्लेख किया गया है। इनमें नियम 352 और 353 चर्चा के दौरान आरोपों और किसी व्यक्ति के आचरण से जुड़े संदर्भों से संबंधित हैं।

वहीं, नियम 380 के तहत अध्यक्ष को असंसदीय शब्दों या टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही से हटाने का अधिकार है। शिकायत में नियम 373, 374 और 374ए का भी उल्लेख किया गया है, जिनके तहत अव्यवस्थित आचरण या पीठ के अधिकार की अवहेलना की स्थिति में कार्रवाई का प्रावधान है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल राहुल गांधी के पास 28 अगस्त तक अपना पक्ष रखने का मौका है। उनके जवाब के बाद शिकायतों और उनके स्पष्टीकरण पर आगे की प्रक्रिया तय होगी। यह मामला लोकसभा में संसदीय भाषा, सदन की मर्यादा और विशेषाधिकार से जुड़े नियमों के पालन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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