भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के ऑफर फॉर सेल (OFS) को निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला और यह दो दिनों में ही पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। सरकार ने इस दौरान ग्रीन शू ऑप्शन का भी इस्तेमाल किया। हालांकि, OFS पूरा होने के बाद LIC के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब निवेशकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली, तो फिर शेयरों पर दबाव क्यों आया? आइए जानते हैं इसकी प्रमुख वजहें।
क्या है OFS?
ऑफर फॉर सेल (OFS) एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके जरिए किसी सूचीबद्ध कंपनी का मौजूदा बड़ा शेयरधारक स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी बेचता है। LIC के मामले में भारत सरकार ने अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचा है। इस प्रक्रिया में कंपनी कोई नए शेयर जारी नहीं करती और बिक्री से मिलने वाली पूरी राशि सरकार के पास जाती है। यानी LIC की कुल शेयर संख्या में कोई बदलाव नहीं होता, केवल सरकार की हिस्सेदारी घटती है और सार्वजनिक निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ती है।
सरकार ने हिस्सेदारी क्यों बेची?
सरकार के पास पहले LIC में करीब 96.5 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जबकि सार्वजनिक निवेशकों के पास केवल 3.5 प्रतिशत शेयर थे। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों के अनुसार सूचीबद्ध कंपनियों में न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करना जरूरी है। इसी नियम का पालन करने के लिए सरकार ने OFS के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेची। इस बिक्री के बाद सार्वजनिक शेयरधारिता बढ़कर 10 प्रतिशत के करीब पहुंच गई, जो निर्धारित समयसीमा से पहले ही हासिल कर ली गई।
शेयरों में गिरावट क्यों आई?
सरकार ने OFS के लिए 382 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया, जो OFS की घोषणा से पहले के बाजार भाव 428.50 रुपये से लगभग 10.9 प्रतिशत कम था। जब निवेशकों को कम कीमत पर शेयर खरीदने का मौका मिला तो खुले बाजार में ऊंचे भाव पर खरीदारी कम हो गई। इसके कारण बाजार में शेयर की कीमत OFS के फ्लोर प्राइस के करीब आने लगी और शेयरों पर दबाव बढ़ गया।
इसके अलावा OFS के जरिए बड़ी संख्या में शेयर बाजार में आने से सप्लाई बढ़ गई। आमतौर पर जब किसी शेयर की उपलब्धता अचानक बढ़ती है तो उसकी कीमत पर अल्पकालिक दबाव बनना स्वाभाविक माना जाता है।
LIC का प्रदर्शन कैसा रहा?
बाजार में आई इस गिरावट के बावजूद LIC के वित्तीय प्रदर्शन में सुधार देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के नए व्यवसाय का मूल्य (Value of New Business) लगभग 41.6 प्रतिशत बढ़कर 14,179 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, कंपनी का मार्जिन 17.6 प्रतिशत से बढ़कर 21.2 प्रतिशत हो गया है। इसके अलावा कंपनी का शुद्ध लाभ भी करीब 19.3 प्रतिशत बढ़कर 57,419 करोड़ रुपये रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि OFS के बाद शेयरों में आई गिरावट मुख्य रूप से तकनीकी और बाजार आधारित कारणों से हुई है। कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन को देखते हुए लंबी अवधि में निवेशकों की नजर LIC पर बनी रह सकती है।
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