राजधानी दिल्ली में मंगलवार को हुई कुछ घंटों की मूसलाधार बारिश ने नगर निगम और प्रशासन की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी। तेज बारिश के बाद वीवीआईपी इलाकों से लेकर बाहरी दिल्ली तक कई स्थानों पर जलभराव हो गया, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सबसे अधिक असर नई दिल्ली के वीवीआईपी क्षेत्रों में देखने को मिला। गोल मार्केट, जनपथ, कनॉट प्लेस, शाहजहां रोड, कृष्णा मेनन मार्ग, लोधी कॉलोनी, सरोजिनी नगर, कस्तूरबा गांधी मार्ग, केजी मार्ग, साउथ एवेन्यू, आईएनए, बंगाली मार्केट और गोल्फ लिंक समेत कई प्रमुख इलाकों की सड़कें पानी में डूब गईं। कई जगह वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जबकि दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
बारिश के दौरान कई इलाकों में पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं भी सामने आईं। एनडीएमसी के नियंत्रण कक्ष में जलभराव, पेड़ गिरने और बिजली गुल होने की 38 शिकायतें दर्ज की गईं, जबकि एमसीडी के नियंत्रण कक्ष में चार घंटे के भीतर 35 से अधिक शिकायतें पहुंचीं। दोनों एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार राजधानी में कुल 70 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं।
एमसीडी क्षेत्र के रोहिणी, नरेला, करोल बाग, शाहदरा, केशवपुरम, पश्चिम विहार, ओखला, द्वारका, वसंत कुंज, लाजपत नगर, तिलक नगर, विकासपुरी और अन्य कई इलाकों में भी जलभराव और पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। कई सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित रहा।
हालांकि एनडीएमसी और एमसीडी ने दावा किया कि शिकायत मिलते ही राहत टीमें मौके पर भेजी गईं, पंपों के जरिए पानी निकाला गया और गिरे हुए पेड़ों को हटाकर यातायात बहाल करने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद कुछ घंटों की बारिश ने राजधानी की जलनिकासी व्यवस्था और प्री-मानसून तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
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