पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से 58 लाख से अधिक नाम हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग, पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब तलब किया है। अदालत ने उस जनहित याचिका पर सुनवाई की, जिसमें मतदाता सूची से हटाए गए नामों से जुड़े दावों और आपत्तियों का विधानसभा क्षेत्रवार पूरा डेटा सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई की। यह जनहित याचिका पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस समिति की SIR समिति के अध्यक्ष प्रसेनजीत बोस की ओर से दायर की गई है।
याचिका में मांग की गई है कि निर्वाचन आयोग विधानसभा क्षेत्रवार यह जानकारी सार्वजनिक करे कि फॉर्म-6 और फॉर्म-7 के कितने आवेदन प्राप्त हुए, कितने स्वीकार किए गए, कितने खारिज हुए और अपीलीय न्यायाधिकरणों में कितने मामले लंबित या निपटाए गए। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस जानकारी के सार्वजनिक न होने से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि 33.5 लाख से अधिक अपीलें अभी भी लंबित हैं। वहीं, जिन मामलों का निपटारा हो चुका है, उनमें लगभग 70 फीसदी दावों को स्वीकार किया गया है। उनका कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटने के कारण कई लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), अन्नपूर्णा योजना और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करना निर्वाचन आयोग का अधिकार नहीं है। यदि किसी मामले में नागरिकता को लेकर विवाद होता है, तो उसे नागरिकता कानून के तहत केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय को भेजा जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि निर्वाचन आयोग की भूमिका केवल मतदाता सूची के प्रबंधन और निगरानी तक सीमित है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि SIR प्रक्रिया के दौरान 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जबकि दावों और आपत्तियों के चरण में 9.64 लाख नए नाम जोड़ने और 99 हजार से अधिक नाम हटाने के आवेदन प्राप्त हुए। इसके बावजूद अंतिम मतदाता सूची में केवल करीब 1.82 लाख नए नाम ही जोड़े गए।
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को SIR से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं के साथ सुनने का निर्णय लिया है। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।
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