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सोशल मीडिया पर लड़कियों की फोटो का दुरुपयोग, फर्जी अकाउंट से करोड़ों की कमाई का खुलासा; तीन गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने ऑनलाइन वीडियो कॉलिंग और गेमिंग एप के जरिए करोड़ों रुपये कमाने वाले एक गिरोह का खुलासा किया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य दूसरी लड़कियों की तस्वीरों का इस्तेमाल कर फर्जी आईडी बनाते थे। इन आईडी के माध्यम से लड़कियों से लाइव होस्टिंग और वीडियो कॉल कराई जाती थी। यूजर्स की ओर से मिलने वाले डिजिटल कॉइन और वीडियो कॉलिंग से होने वाली कमाई को बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। एसटीएफ ने रविवार सुबह मथुरा से गिरोह के सरगना समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रवीण कुमार उर्फ प्रकाश, विपिन कुमार और अर्जुन दिवाकर के रूप में हुई है। तीनों मथुरा के रहने वाले हैं। एसटीएफ के एएसपी विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक, पूछताछ में सामने आया कि आरोपी फर्जी आईडी बनाकर लड़कियों को लाइव होस्टिंग के काम पर रखते थे। इसके बदले उन्हें हर महीने 12 से 15 हजार रुपये वेतन दिया जाता था। इन आईडी पर काम करने वाली लड़कियां अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर गतिविधियां संचालित करती थीं।

ऐसे चलता था कमाई का पूरा खेल

एसटीएफ की पूछताछ में आरोपी प्रवीण कुमार ने बताया कि वर्ष 2023 में उसकी मुलाकात एक हैकर से हुई थी। उसी के माध्यम से उसे चैमेट एप के बारे में जानकारी मिली। इस एप पर यूजर्स डिजिटल कॉइन खरीदकर लाइव होस्टिंग करने वाली लड़कियों को गिफ्ट देते थे।

आरोपी के मुताबिक, करीब 300 रुपये में 10 हजार डिजिटल कॉइन मिलते थे। गिफ्ट के रूप में मिले कॉइन की रकम का 50 प्रतिशत हिस्सा होस्ट और 50 प्रतिशत कंपनी को मिलता था। वहीं, वीडियो कॉलिंग से होने वाली कमाई में 60 प्रतिशत हिस्सा होस्ट और 40 प्रतिशत कंपनी को दिया जाता था।

वर्तमान में चैमेट एप चिलचैट नाम से पंजीकृत है। एसटीएफ के अनुसार, गिरोह इसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से कमाई कर रहा था।

विदेशी कंपनी से खातों में आती थी रकम

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अपने और गिरोह के अन्य सदस्यों के बैंक खाते एप से जोड़ रखे थे। इन खातों में फुलियाओ हांगकांग लिमिटेड नाम की विदेशी कंपनी से कमीशन की रकम आती थी। डिजिटल कॉइन की कमाई डॉलर के रूप में दिखाई जाती थी, जिसे बाद में एरटेल पे और एमपे जैसे भुगतान एप के माध्यम से बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता था।

पुलिस का दावा है कि गिरोह ने इस तरीके से करोड़ों रुपये की कमाई की। आरोपी अर्जुन दिवाकर ने पूछताछ में बताया कि उसने वर्ष 2023 में यूट्यूब पर चैमेट एप के बारे में जानकारी हासिल की थी। इसके बाद उसने मथुरा के मोतीकुंज में एक कार्यालय किराये पर लेकर लड़कियों को काम पर रखना शुरू किया।

सात मोबाइल फोन समेत कई सामान बरामद

एसटीएफ ने आरोपियों के पास से सात मोबाइल फोन, एक सीपीयू, तीन चेकबुक, एक पासबुक, आधार कार्ड, तीन डेबिट कार्ड, 58 स्क्रीनशॉट के प्रिंटआउट और एक फोर्ड कार बरामद की है।

आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट और ऑनलाइन गेमिंग कानून के तहत मामला दर्ज कराया गया है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी, जिससे गिरोह की गतिविधियों और लेनदेन से जुड़ी अन्य जानकारियां सामने आ सकती हैं।

गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी

एसटीएफ अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और बैंक खातों के माध्यम से कितनी रकम का लेनदेन किया गया। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी।

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