भारतीय महिला हॉकी टीम का विश्व कप में पदक जीतने का सपना बेहद दर्दनाक अंदाज में टूट गया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेहद अहम मुकाबले में भारतीय टीम ने शानदार संघर्ष करते हुए गोलरहित ड्रॉ खेला, लेकिन इसके बावजूद गोल गणना के आधार पर टीम सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गई। मुकाबला खत्म होते ही भारतीय खिलाड़ियों के चेहरे पर मायूसी छा गई और कई खिलाड़ी अपने आंसू नहीं रोक सकीं।
मैच समाप्त होने के बाद भारतीय खेमे में भावुक माहौल देखने को मिला। अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया और बिछू देवी डगआउट में ही रो पड़ीं, जबकि पहली बार विश्व कप खेल रहीं कई युवा खिलाड़ियों को इतने करीब पहुंचकर मौका हाथ से निकल जाने का गहरा सदमा लगा। भारतीय खिलाड़ी मैदान से बाहर निकलीं तो उनकी लाल आंखें और उदास चेहरे हार से मिले दर्द की कहानी बयां कर रहे थे।
भारत और ऑस्ट्रेलिया अंक और गोल अंतर के मामले में बराबरी पर रहे, लेकिन अगले टाईब्रेकर में ऑस्ट्रेलिया ने अधिक गोल किए होने के कारण सेमीफाइनल में जगह बना ली। भारतीय टीम को अंतिम-चार में पहुंचने के लिए जीत चाहिए थी, मगर पूरे मैच में कई अच्छे मौके मिलने के बावजूद टीम गोल नहीं कर सकी। यही एक गोल भारतीय टीम के विश्व कप पदक के सपने और सेमीफाइनल के बीच सबसे बड़ी दीवार बन गया।
भारतीय टीम की कप्तान सलीमा टेटे ने भी स्वीकार किया कि इतने करीब पहुंचकर पदक की दौड़ से बाहर होना बेहद निराशाजनक है। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में संघर्ष किया और कई मौकों पर शानदार खेल दिखाया, लेकिन निर्णायक मुकाबले में फिनिशिंग की कमी भारी पड़ गई। कोच शोर्ड मारिन ने भी माना कि अहम मुकाबले के दबाव और नर्वसनेस का असर टीम के खेल पर पड़ा।
भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए यह हार इसलिए भी ज्यादा दर्दनाक है क्योंकि विश्व कप में भारत अब तक पदक नहीं जीत पाया है। 11 खिलाड़ियों के लिए यह पहला विश्व कप था और टीम को लग रहा था कि इस बार इतिहास रचने का सुनहरा मौका उनके सामने है। हालांकि पदक की उम्मीद खत्म हो चुकी है, लेकिन भारतीय टीम का सफर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब टीम 27 अगस्त को पांचवें स्थान के मुकाबले में उतरेगी और जीत के साथ टूर्नामेंट का अंत करने की कोशिश करेगी।
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