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रुपये की कमजोरी दूर करने की तैयारी? LTCG टैक्स पर वित्त मंत्री के संकेत से बाजार की नजरें सरकार पर

रुपये में जारी गिरावट और उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले दिनों में और कड़े नियामकीय कदम उठा सकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में आयोजित ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ में कहा कि रिजर्व बैंक का उद्देश्य रुपये को किसी निश्चित स्तर पर बनाए रखना नहीं, बल्कि उसकी विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकना है।

वहीं, लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर हितधारकों की प्रतिक्रियाओं पर विचार करने संबंधी वित्त मंत्री की टिप्पणी के बाद शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली। बाजार में आई इस बढ़त से निवेशकों की संपत्ति में भी इजाफा हुआ।

रुपये को संभालने के लिए RBI के कदम

वित्त मंत्री के मुताबिक, पिछले एक साल में रुपये में आई गिरावट के पीछे वैश्विक चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां प्रमुख कारण रही हैं। इस बीच रिजर्व बैंक मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रत्यक्ष हस्तक्षेप और नियामकीय उपायों का सहारा ले रहा है।

डॉलर की बिक्री: रुपये पर दबाव कम करने के लिए रिजर्व बैंक ने सोमवार को बाजार में डॉलर की बिक्री की। इसके बाद रुपये में पिछले छह महीनों की सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त दर्ज होने की जानकारी दी गई।

फॉरेक्स हेजिंग नियमों में सख्ती: RBI ने विदेशी मुद्रा जोखिम से बचाव यानी हेजिंग से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। इसके तहत कैश डिपॉजिट संबंधी आवश्यकताओं का दायरा बढ़ाया गया है, जिसमें बैंकों की अपनी परिसंपत्तियों और देनदारियों से जुड़े हेजिंग सौदे भी शामिल हैं।

नॉन-डिलीवरेबल डेरिवेटिव्स पर नियंत्रण: अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) में सक्रिय बैंक इकाइयों और प्राथमिक डीलरों के लिए गैर-निवासियों को उपलब्ध कराए जाने वाले नॉन-डिलीवरेबल रुपया डेरिवेटिव्स (NDDC) से जुड़े नियम भी कड़े किए गए हैं। इनका इस्तेमाल हेजिंग उद्देश्यों तक सीमित रखने की व्यवस्था की गई है।

LTCG टैक्स पर चर्चा से शेयर बाजार को मिली राहत

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और वैश्विक दबावों के बीच LTCG टैक्स को लेकर वित्त मंत्री की टिप्पणी को बाजार ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया। इसके बाद शेयर बाजार में जोरदार तेजी दर्ज की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, BSE सेंसेक्स 1,000 अंकों से अधिक चढ़कर 72,900 के पार पहुंच गया, जबकि NSE निफ्टी 300 से अधिक अंक बढ़कर 22,700 के स्तर को पार कर गया। आईटी शेयरों में आई तेजी ने भी बाजार को सहारा दिया।

इस तेजी के दौरान सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर करीब 469 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इससे निवेशकों की संपत्ति में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

हालांकि, LTCG टैक्स में बदलाव या इसे समाप्त करने का कोई अंतिम फैसला घोषित नहीं किया गया है। वित्त मंत्री की टिप्पणी को इस मुद्दे पर हितधारकों की राय पर विचार करने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

SBI रिसर्च ने भी दिया था LTCG टैक्स पर सुझाव

SBI रिसर्च ने अपनी ‘इकोरैप’ रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की दीर्घकालिक भागीदारी बनाए रखने के लिए इक्विटी निवेश पर लगने वाले LTCG टैक्स को समाप्त करने के विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स व्यवस्था में संभावित बदलाव से घरेलू निवेशकों के व्यवहार और बाजार में पूंजी के प्रवाह पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव किसी भी नीतिगत फैसले और उसके लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

वैश्विक दबाव के बीच अर्थव्यवस्था पर सरकार का भरोसा

विदेशी पूंजी की निकासी और रुपये पर दबाव के बावजूद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय अर्थव्यवस्था के व्यापक आर्थिक संकेतकों पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी सरकार राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

कमजोर रुपये का असर निर्यात और आयात पर अलग-अलग तरीके से पड़ सकता है। इससे निर्यातकों को कुछ परिस्थितियों में लाभ मिल सकता है, जबकि आयातित कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं की लागत बढ़ने का जोखिम रहता है। वहीं, RBI के नियामकीय कदमों से विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?

फिलहाल बाजार की नजर रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों के रुख, रिजर्व बैंक के अगले कदमों और LTCG टैक्स पर सरकार की संभावित नीति पर बनी रहेगी। वित्त मंत्री के बयान से निवेशकों को उम्मीद जरूर मिली है, लेकिन टैक्स में किसी बदलाव को लेकर अंतिम निर्णय आने तक बाजार की दिशा वैश्विक परिस्थितियों और आर्थिक आंकड़ों से भी प्रभावित होती रहेगी।

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