विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र में ग्लोबल साउथ देशों की बैठक को संबोधित किया। उन्होंने बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक चुनौतियों, जलवायु संबंधी संकट और बहुपक्षीय व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के बीच ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई।
जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक संकटों में ग्लोबल साउथ सबसे आगे है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका अभी भी सीमित है। उन्होंने कहा कि पुरानी संस्थाएं आज भी पुराने सत्ता-ढांचे को प्रतिबिंबित करती हैं और ग्लोबल साउथ को उन निर्णय लेने वाले ढांचों में शामिल किया जाना चाहिए, जो उसके भविष्य से जुड़े मुद्दों पर फैसले करते हैं।
विदेश मंत्री ने सप्लाई चेन, वित्त और कनेक्टिविटी में रुकावटों, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और निष्पक्ष व्यापार जैसे मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए ऊर्जा की उपलब्धता और कीमतों में हेरफेर नहीं होना चाहिए। साथ ही, औद्योगीकरण के अधिकार से विकासशील देशों को वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
जयशंकर ने समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण दुनिया में नई तरह की दूरी या विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए।
उन्होंने भारत और लैटिन अमेरिकी एवं कैरेबियाई देशों के संगठन CELAC के बीच आर्थिक और विकास साझेदारी मजबूत करने की भी बात कही। जयशंकर के अनुसार, भारत-CELAC व्यापार सालाना 50 अरब अमेरिकी डॉलर का आंकड़ा पार कर चुका है।
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