Monday , September 14 2026

उत्तराखंड की राजनीति में फिर हलचल: हरीश रावत के अगले कदम से तय होगी नई सियासी दिशा

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत एक बार फिर अपने बयानों और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा में हैं। पार्टी के विभिन्न पदों से इस्तीफा देने की पेशकश की खबरों के बीच अब सबकी नजर उनके अगले कदम पर है। भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस के भीतर भी रावत के फैसले को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।

हरीश रावत ने कुछ दिन पहले अपने राजनीतिक संन्यास को लेकर कहा था कि वह छिप-छिपाकर संन्यास नहीं लेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि उनके कुछ ‘चितकबरे चहेतों’ ने उन्हें सक्रिय राजनीति से संन्यास दिलाने की सुपारी ले रखी है। उनके इस बयान के बाद उत्तराखंड की सियासत में चर्चाएं तेज हो गईं।

क्या राजनीतिक संन्यास की ओर बढ़ रहे हैं रावत?

रावत का राजनीतिक सफर करीब छह दशक लंबा रहा है। कुमाऊं से लेकर गढ़वाल तक उन्होंने उत्तराखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में अगर कांग्रेस आलाकमान उनकी ओर से पदों से इस्तीफे की पेशकश स्वीकार कर लेता है, तो इसे उनके सक्रिय राजनीतिक जीवन से दूरी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा सकता है।

हालांकि, रावत की सक्रिय राजनीतिक शैली को देखते हुए यह भी माना जा रहा है कि वह किसी नए राजनीतिक संघर्ष के लिए खुद को तैयार कर सकते हैं।

ईडी की कार्रवाई से बढ़ी मुश्किलें

रावत के राजनीतिक भविष्य के बीच उनके पूर्व ओएसडी रहे चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई भी चर्चा में है। यूकेएसएसएससी वीपीडीओ भर्ती परीक्षा-2016 में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में यह कार्रवाई हुई है।

लेख के मुताबिक, अगर जांच आगे बढ़ती है या मामला लंबा खिंचता है तो भाजपा इसे आगामी चुनाव में कांग्रेस और हरीश रावत के खिलाफ राजनीतिक मुद्दा बना सकती है।

लंबी राजनीतिक पारी के बाद फिर परीक्षा

हरीश रावत अपने राजनीतिक जीवन में कई चुनावी हार और उतार-चढ़ाव देख चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सक्रिय राजनीति नहीं छोड़ी। कांग्रेस नेतृत्व ने भी उन्हें लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दीं।

अब रावत के सामने एक बार फिर राजनीतिक परीक्षा की स्थिति है। उन्हें यह तय करना होगा कि वह सक्रिय राजनीति से दूरी बनाएंगे या नए तेवर के साथ आगामी सियासी संघर्ष में उतरेंगे। इसी फैसले पर न सिर्फ कांग्रेस बल्कि भाजपा की भी नजर टिकी हुई है।

Check Also

देहरादून में हत्या की सुपारी का खुलासा: प्रेमी की सगाई से नाराज थी प्रेमिका, पांच लाख में तय हुआ सौदा

बड़ोवाला में बैंककर्मी सत्यम कुमार पर हुई फायरिंग के मामले में पुलिस ने कथित साजिश ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *