भारतीय पेटेंट कार्यालय (IPO) ने फार्मास्यूटिकल और बायोटेक्नोलॉजी पेटेंट आवेदनों की जांच के लिए नई मसौदा गाइडलाइन प्रस्तावित की है। इसका उद्देश्य पेटेंट जांच की गुणवत्ता, एकरूपता और पारदर्शिता बढ़ाना है। खास बात यह है कि अदालतों के हालिया और विकसित होते फैसलों से सामने आई कानूनी व्याख्याओं को भी नई गाइडलाइन में शामिल किया जाएगा।
गलत पेटेंट से समाज पर पड़ सकता है असर
आईपीओ के मुताबिक, फार्मास्यूटिकल पेटेंटिंग बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र है। किसी गलत या अनुचित पेटेंट का असर समाज पर पड़ सकता है, जबकि मजबूत और उचित पेटेंट नई तकनीक तथा नवाचार को बढ़ावा देते हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए कार्यालय पेटेंट जांच की प्रक्रिया में गुणवत्ता, स्थिरता और एकरूपता लाने पर जोर दे रहा है।
कोर्ट के फैसलों को जांच प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा
4 सितंबर को जारी मसौदे में कहा गया है कि फार्मास्यूटिकल उत्पाद पेटेंट से जुड़े कई मुद्दों पर अदालतों के फैसलों के जरिए कानूनी स्थिति लगातार स्पष्ट हो रही है। इसलिए इन न्यायिक फैसलों में सामने आए विश्लेषण और व्याख्याओं को पेटेंट आवेदनों की जांच का हिस्सा बनाया जाएगा।
इससे पेटेंट परीक्षकों और नियंत्रकों को अलग-अलग मामलों में अधिक स्पष्ट और समान मानकों के आधार पर निर्णय लेने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भारत की ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ भूमिका
मसौदे में भारत की वैश्विक फार्मास्यूटिकल भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। भारत को दुनिया की ‘फार्मेसी’ के रूप में देखा जाता है, इसलिए देश में दवाओं से जुड़े पेटेंट का प्रभाव घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पड़ सकता है।
बायोटेक पेटेंट के लिए भी नई गाइडलाइन
भारतीय पेटेंट कार्यालय ने बायोटेक्नोलॉजी पेटेंट आवेदनों की जांच के लिए भी अलग मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसमें नवीनता, स्पष्टता, औद्योगिक उपयोगिता, आविष्कार की गैर-स्पष्टता और पर्याप्त खुलासा जैसे प्रमुख पहलुओं को शामिल किया गया है।
इसके अलावा जीन अनुक्रम, कृषि पशुओं की क्लोनिंग, स्टेम सेल और जीन डायग्नोस्टिक्स जैसे जटिल विषयों से जुड़े पेटेंट मामलों का भी उल्लेख किया गया है।
जांच में समानता और पारदर्शिता पर जोर
प्रस्तावित दिशानिर्देशों का व्यापक उद्देश्य पेटेंट अधिनियम, 1970 के तहत काम करने वाले परीक्षकों और नियंत्रकों को स्पष्ट दिशा देना है। आईपीओ चाहता है कि समान प्रकृति के मामलों में जांच के मानक अनावश्यक रूप से अलग न हों और पेटेंट व्यवस्था अधिक विश्वसनीय तथा पारदर्शी बने।
यह फिलहाल मसौदा गाइडलाइन है और इसका उद्देश्य मौजूदा पेटेंट जांच प्रक्रिया को अद्यतन करना है।
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