Wednesday , July 15 2026

बंगाल में तस्लीमा नसरीन की वापसी से सियासत तेज, 19 साल बाद कोलकाता में भाजपा के मंच पर होंगी मौजूद

बांग्लादेश की चर्चित लेखिका तस्लीमा नसरीन करीब 19 वर्षों बाद एक बार फिर कोलकाता लौटने जा रही हैं। वर्ष 2007 में उनके लेखन के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद उन्हें शहर छोड़ना पड़ा था। अब 1 अगस्त को वह कोलकाता के रवींद्र सदन में आयोजित एक ‘कट्टरता विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम’ में हिस्सा लेंगी। इस वापसी को पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक कट्टरता के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में पेश कर रही है।

सोशल मीडिया पर दी कार्यक्रम की जानकारी

तस्लीमा नसरीन ने स्वयं सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी कोलकाता यात्रा की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि वह कार्यक्रम में शामिल होने के साथ अपनी कविताओं का पाठ भी करेंगी। इस आयोजन में कई धर्मनिरपेक्ष और कट्टरता विरोधी संगठनों की भागीदारी रहेगी। आयोजकों का कहना है कि यह सिर्फ एक साहित्यिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन का मंच होगा।

आयोजकों ने क्या कहा?

कार्यक्रम के आयोजक और ‘पश्चिमबांगर जोन्नो’ संगठन से जुड़े मोहित रॉय ने कहा कि तस्लीमा नसरीन की यह वापसी कोलकाता के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगी। उनके अनुसार, वर्ष 2007 में तत्कालीन सरकार ने कट्टरपंथी दबाव के आगे झुककर उन्हें शहर छोड़ने पर मजबूर किया था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उन्होंने दावा किया कि इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल सरकार के कई प्रमुख नेता भी शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, जब आयोजकों से पूछा गया कि क्या तस्लीमा नसरीन भविष्य में स्थायी रूप से कोलकाता में रहेंगी, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई है।

भाजपा के लिए राजनीतिक संदेश

भाजपा इस कार्यक्रम को केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि राजनीतिक और वैचारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मान रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि पिछली सरकारों ने वोट बैंक की राजनीति के कारण तस्लीमा नसरीन की वापसी का रास्ता नहीं खोला, जबकि वह लंबे समय से कोलकाता आने की इच्छा जताती रही थीं।

दूसरी ओर, तस्लीमा नसरीन पहले भी कह चुकी हैं कि वह किसी राजनीतिक दल का प्रतीक नहीं बनना चाहतीं। उनका कहना रहा है कि उन्हें केवल शांति से साहित्यिक कार्यक्रमों और पुस्तक मेलों में भाग लेने का अवसर मिलना चाहिए।

तस्लीमा नसरीन की प्रस्तावित वापसी को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सभी की नजर 1 अगस्त को होने वाले इस कार्यक्रम पर टिकी है, जिसे राज्य की राजनीति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।

Check Also

कोरोना को लेकर ओडिशा सरकार सख्त, अस्पतालों को नई गाइडलाइन; आंध्र प्रदेश में मौत के बाद बढ़ी चिंता

भुवनेश्वर। पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में कोरोना संक्रमण से दो मरीजों की मौत के बाद ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *