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भारत की हाईटेक रक्षा योजना: 50 स्वार्म ड्रोन बदलेंगे युद्ध का खेल, DRDO तैयार करेगा स्वदेशी तकनीक

भारत भविष्य के युद्धों की चुनौतियों से निपटने के लिए स्वदेशी स्वार्म ड्रोन तकनीक विकसित करने जा रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 50 ड्रोन वाले स्वार्म सिस्टम के विकास के लिए प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस परियोजना के तहत अगले 24 महीनों में ऐसा ड्रोन नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो दुश्मन की गतिविधियों पर एक साथ निगरानी रखने और कठिन परिस्थितियों में भी मिशन पूरा करने में सक्षम होगा।

इस सिस्टम में 49 ड्रोन 7×7 ग्रिड फॉर्मेशन में उड़ेंगे, जबकि एक मास्टर ड्रोन पूरे बेड़े को नियंत्रित करेगा। मास्टर ड्रोन ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन से निर्देश प्राप्त करेगा और सभी ड्रोन के बीच समन्वय बनाए रखेगा। प्रत्येक ड्रोन को 5 सेंटीमीटर तक की सटीकता के साथ उड़ान भरने के लिए डिज़ाइन किया जाएगा।

स्वार्म ड्रोन 72 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवा में भी उड़ान भर सकेंगे और 5,000 मीटर की ऊंचाई तक संचालन कर पाएंगे। ये ड्रोन ग्राउंड स्टेशन से 15 से 25 किलोमीटर की दूरी तक मिशन पूरा कर वापस लौट सकेंगे। प्रत्येक ड्रोन 500 ग्राम से 2 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने में सक्षम होगा। इनकी न्यूनतम उड़ान अवधि 30 मिनट होगी और इन्हें केवल 15 मिनट में रैपिड चार्ज किया जा सकेगा।

दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक हमलों और जैमिंग से बचाने के लिए ड्रोन में जैमर-प्रतिरोधी संचार प्रणाली लगाई जाएगी। यह तकनीक निगरानी, टोही (Reconnaissance) और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे अभियानों में सेना की क्षमता को कई गुना बढ़ाएगी, खासकर सीमावर्ती और पहाड़ी इलाकों में।

DRDO ने परियोजना में कम से कम 70 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के उपयोग को अनिवार्य किया है। साथ ही प्रतिद्वंद्वी देशों से खरीदे गए कमर्शियल कंपोनेंट्स के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। इस प्रोजेक्ट में भारतीय MSME, स्टार्टअप और निजी कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्वदेशी स्वार्म ड्रोन सिस्टम भविष्य के युद्धों में भारतीय सेना के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।

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