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IMF ने भारत की जीडीपी कार्यप्रणाली का किया समर्थन, आर्थिक विकास को बताया सकारात्मक

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की संशोधित सकल घरेलू उत्पाद (GDP) गणना कार्यप्रणाली का समर्थन किया है। IMF ने इसे ‘स्वागत योग्य कदम’ बताते हुए कहा कि भारत की नई कार्यप्रणाली सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है और उसके सांख्यिकी विभाग की सलाह से मेल खाती है।

IMF के एशिया और प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने गुरुवार को बैंकॉक में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भारत की संशोधित GDP कार्यप्रणाली की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने कार्यप्रणाली में किए गए बदलावों को स्पष्ट करने के लिए एक नोट भी जारी किया है। उन्होंने सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के प्रयासों की प्रशंसा की।

GDP गणना में बदलाव को IMF की मंजूरी

कृष्णा श्रीनिवासन ने स्पष्ट किया कि भारत की GDP गणना प्रणाली में किए गए संशोधन IMF की सलाह के अनुरूप हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने जो बदलाव किए हैं, वे अच्छी सांख्यिकीय कार्यप्रणालियों के अनुकूल हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है।

भारत की GDP गणना प्रणाली को लेकर हाल के महीनों में राजनीतिक और आर्थिक बहस हुई थी। ऐसे में IMF का यह समर्थन भारतीय अर्थव्यवस्था के आंकड़ों और उन्हें तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर अहम माना जा रहा है।

ऊर्जा संकट से निपटने में भारत की प्रतिक्रिया की सराहना

IMF के अधिकारी ने ऊर्जा संकट से निपटने के भारत के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि मजबूत आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों के कारण भारत ने इस संकट का बेहतर तरीके से सामना किया है।

उन्होंने विनिमय दर में उतार-चढ़ाव को लेकर कहा कि रुपये पर दबाव को सीधे तौर पर आर्थिक विफलता का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। विनिमय दर पर वैश्विक ब्याज दरों, निवेशकों की जोखिम लेने की प्रवृत्ति और तेल की कीमतों सहित कई कारकों का प्रभाव पड़ता है। इसलिए विनिमय दर में दबाव और आर्थिक वृद्धि के बीच सीधा संबंध मानना उचित नहीं है।

GDP के आंकड़ों को लेकर क्यों हुआ था विवाद?

पिछले महीने जून तिमाही में भारत की GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई थी। पूर्व वित्त सचिव एससी गर्ग ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए दावा किया था कि पिछले वर्ष के आंकड़ों में संशोधन के कारण GDP वृद्धि दर अधिक दिखाई दे रही है। विपक्षी दलों ने भी इन दावों के आधार पर सरकार से आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल पूछे थे।

इसके जवाब में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने गर्ग के तर्कों को चुनिंदा आंकड़ों पर आधारित बताया था। उन्होंने कहा था कि नए आधार वर्ष के अनुसार GDP के आंकड़े तैयार किए गए हैं, जिसके कारण पिछले वर्षों के तिमाही आंकड़ों में भी संशोधन हुआ है।

IMF के ताजा बयान में भारत की संशोधित GDP गणना कार्यप्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बताया गया है।

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