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फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों से भारी नुकसान, ऐतिहासिक सिटी हॉल में लगी आग; पुलिस की रणनीति बदलेगी सरकार

दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) अदालत ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजकों सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी है। पुलिस की मांग पर अदालत ने यह फैसला सुनाया। इससे पहले, दोनों नेताओं की रिहाई से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

हिरासत बढ़ाने पर सीजेपी ने उठाए सवाल

सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने अदालत के फैसले पर नाराजगी जताते हुए इसे न्यायिक प्रक्रिया का मखौल बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले छह दिनों से जमानतदार के सत्यापन और अन्य कारणों का हवाला देकर रिहाई में देरी की जा रही है।

रत्ना सिंह के मुताबिक, सुनवाई के दौरान पार्टी के वकीलों ने कानूनी पहलुओं पर दलीलें रखीं, लेकिन न्यायिक हिरासत बढ़ाने का कोई ठोस कारण सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि पार्टी इस फैसले को चुनौती देगी।

पहले पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए थे

सौरव दास और आशुतोष रांका को इससे पहले अदालत ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। दोनों पर पहले से तय बेल बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप है। इसी मामले में शामिल सीजेपी नेता अजिंक्य शिंदे को नया बेल बॉन्ड भरने के बाद राहत मिली थी।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद हुई थी कार्रवाई

यह मामला जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बावजूद वहां प्रदर्शन किया था। सीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग पार कर तिरंगा लहराया और नारेबाजी की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

सीजेपी और अन्य विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।

सीजेपी संस्थापक ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने नेताओं के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा कि क्या राष्ट्रीय ध्वज फहराना भी गैरकानूनी हो गया है। उन्होंने सरकार पर विरोध की आवाज दबाने के लिए कार्रवाई करने का आरोप लगाया।

वहीं, पार्टी नेता अजिंक्य शिंदे ने दावा किया कि सौरव दास और आशुतोष रांका को तिरंगा लहराने और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने के कारण जेल भेजा गया। उन्होंने सरकार पर मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया।

एसआईआर को लेकर जारी है विवाद

सीजेपी और विपक्षी दलों की मांग है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय की जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, वे नाम दोबारा जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के बाद यह विवाद और बढ़ गया है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान जैसे वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए हैं। सीजेपी इस फैसले का विरोध कर रही है और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने की मांग कर रही है।

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