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ग्राउंड रिपोर्ट: प्रदूषण और अतिक्रमण की मार से सिमटती जा रही सरायन नदी, सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर

कभी क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली सरायन नदी आज गंभीर प्रदूषण और अतिक्रमण की चपेट में है। नदी को पुनर्जीवित करने के लिए समय-समय पर कई योजनाएं और घोषणाएं की गईं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। शहर का गंदा पानी बिना शोधन के सीधे नदी में गिर रहा है, जिससे इसका अस्तित्व संकट में पड़ गया है।

ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, आलमनगर, नई बस्ती, सिविल लाइंस समेत कई इलाकों का सीवर सीधे सरायन नदी में छोड़ा जा रहा है। सीतापुर शहर में अब तक कोई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) संचालित नहीं है, जिसके कारण घरेलू मलजल बिना उपचार के नदी में पहुंच रहा है।

इसके अलावा हरगांव और कमलापुर की चीनी मिलों का अपशिष्ट तथा पेपर मिलों से निकलने वाला रासायनिक कचरा भी नदी के प्रदूषण का प्रमुख कारण बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन अपशिष्टों से पानी में ऑक्सीजन का स्तर घटता है, जिससे जलीय जीवों और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

नदी के किनारों पर बढ़ते अवैध अतिक्रमण ने भी प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित किया है। कई स्थानों पर खेती और निर्माण कार्यों के कारण नदी का फैलाव सिमट गया है, जिससे बरसात का पानी और भूजल रिचार्ज भी प्रभावित हो रहा है। वहीं, प्लास्टिक कचरा और जलकुंभी नदी के प्रवाह में बाधा बन रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरायन नदी का प्रदूषित पानी आगे चलकर गोमती नदी में भी मिलता है, जिससे व्यापक क्षेत्र के जल स्रोतों पर असर पड़ सकता है।

जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने बताया कि सरायन नदी के पुनर्जीवन के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत नदी का सीमांकन, तटबंध निर्माण, पौधरोपण, प्राकृतिक जल निकासी मार्गों का पुनरुद्धार और अवैध अतिक्रमण हटाने जैसी योजनाओं पर काम किया जाएगा। साथ ही विशेषज्ञों की सिफारिशों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।

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