उत्तर-पूर्वी दिल्ली में वर्ष 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत छह आरोपियों को दोषी करार दिया है। दोषियों को हत्या, दंगा, बलवा, धर्म के आधार पर वैमनस्य फैलाने, घातक हथियार रखने और अन्य गंभीर धाराओं में दोषी पाया गया है। हालांकि, ताहिर हुसैन को आपराधिक साजिश और लोकसेवक के रूप में अपराध करने के आरोपों से बरी कर दिया गया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने ताहिर हुसैन के अलावा नाजिम, कासिम, जावेद, अनस और एक अन्य आरोपी को दोषी ठहराया। वहीं हसीन उर्फ मुल्लाजी, फिरोज, गुलफाम, शोएब, समीर खान और मुंतजिम उर्फ मूसा को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। दोषियों की सजा पर अदालत बाद में फैसला सुनाएगी।
यह मामला दयालपुर थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। अंकित शर्मा के पिता की शिकायत पर केस दर्ज हुआ था। 25 फरवरी 2020 को दंगों के दौरान लापता हुए अंकित शर्मा का शव बाद में एक नाले से बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर धारदार हथियार से 51 वार होने की पुष्टि हुई थी।
कोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट किया कि ताहिर हुसैन का अब पार्टी से कोई संबंध नहीं है। पार्टी के अनुसार, 27 फरवरी 2020 को एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद उन्हें प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था। बाद में उन्होंने एआईएमआईएम के टिकट पर दिल्ली विधानसभा चुनाव भी लड़ा था।
दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि जांच पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर की गई और अदालत ने जांच टीम की मेहनत पर मुहर लगाई है। वहीं दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने फैसले को न्याय की जीत बताते हुए आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल से सार्वजनिक माफी की मांग की।
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