राजधानी दिल्ली में लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों और बैरिकेडिंग से कारोबार प्रभावित होने का मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों और वकीलों ने याचिका दायर कर मांग की है कि विरोध प्रदर्शनों को निर्धारित मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) के तहत नियंत्रित किया जाए। मंगलवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकरणों से इस मामले में जवाब देने के लिए निर्देश लेने को कहा।
शुक्रवार को होगी अगली सुनवाई
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने याचिकाकर्ताओं से विरोध प्रदर्शनों से संबंधित सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं की प्रतियां भी रिकॉर्ड पर पेश करने को कहा।
पीठ ने कहा कि वह ऐसे मामले के दायरे में नहीं आना चाहती, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में पहले से सुनवाई चल रही है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि शीर्ष अदालत में दायर याचिकाओं पर सुनवाई 15 अक्टूबर तक स्थगित की गई है। दिल्ली हाईकोर्ट में अब इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई होगी।
जून-जुलाई से मध्य दिल्ली में हो रहे प्रदर्शन
याचिकाओं के अनुसार, इस साल जून-जुलाई से दिल्ली के मध्य क्षेत्र में चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज के सदस्यों की ओर से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के संबंध में कई निर्देश दे चुका है। उनका कहना है कि इन निर्देशों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए, ताकि आम लोगों और कारोबारियों को परेशानी न हो।
त्योहारों के सीजन में कारोबार प्रभावित होने का दावा
व्यापारियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय पोद्दार ने अदालत में कहा कि अक्टूबर से फरवरी तक का समय कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दौरान त्योहारों और अन्य अवसरों पर बिक्री बढ़ती है। ऐसे समय में विरोध प्रदर्शनों के कारण व्यापार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
याचिकाकर्ता ऋषभ सक्सेना की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सच्चिन पुरी ने दावा किया कि हाल के दिनों में मध्य दिल्ली में सैकड़ों-हजारों लोगों के प्रदर्शन के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि बैरिकेडिंग और प्रदर्शनों के चलते व्यापारियों को करीब 2,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है।
कनॉट प्लेस तक पहुंचने में हो रही परेशानी
वकील सच्चिन पुरी ने अदालत में दलील दी कि प्रदर्शन और बैरिकेडिंग के कारण लोगों को कनॉट प्लेस जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इससे दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कारोबार पर असर पड़ रहा है।
हालांकि, 2,000 करोड़ रुपये के नुकसान का आंकड़ा याचिकाकर्ताओं की ओर से किया गया दावा है। अदालत ने अभी इस दावे पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
अब मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी। इसमें केंद्र सरकार का पक्ष और विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने से जुड़ी याचिकाओं पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।
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