उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) से बगावत कर चुके तीन विधायक अब औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने जा रहे हैं। इनमें गौरीगंज से राकेश प्रताप सिंह, गोसाईगंज से अभय सिंह और कालपी से विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं। तीनों विधायक 14 अक्टूबर को अमेठी में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे।
इस कार्यक्रम को केवल सदस्यता ग्रहण तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की राजनीतिक तैयारियों और संगठनात्मक ताकत के प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है। कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है।
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद बढ़ी थीं अटकलें
तीनों विधायकों ने वर्ष 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान सपा के निर्देश के विपरीत भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद से ही उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। अब करीब ढाई साल बाद उनकी औपचारिक सदस्यता को लेकर कार्यक्रम तय किया गया है।
इससे पहले 5 अक्टूबर को तीनों विधायकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद उनके भाजपा में शामिल होने की चर्चाएं और तेज हो गई थीं।
अमेठी में होगा सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम
भाजपा ने तीनों विधायकों के पार्टी में शामिल होने के लिए अमेठी को चुना है। प्रस्तावित कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी, प्रदेश सरकार के मंत्री राजा मयंकेश्वर शरण सिंह और दिनेश प्रताप सिंह सहित कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है।
इसके अलावा पार्टी के अन्य सांसदों, विधायकों, पदाधिकारियों और केंद्र व प्रदेश सरकार के मंत्रियों के भी कार्यक्रम में पहुंचने की उम्मीद है। बड़ी संख्या में नेताओं की मौजूदगी के जरिए भाजपा इस आयोजन को राजनीतिक संदेश देने वाले कार्यक्रम के रूप में पेश कर सकती है।
तीनों विधायक पहले सपा के टिकट पर जीते थे चुनाव
राकेश प्रताप सिंह ने 2022 के विधानसभा चुनाव में अमेठी जिले की गौरीगंज सीट से जीत हासिल की थी। वहीं, विनोद चतुर्वेदी जालौन की कालपी सीट और अभय सिंह अयोध्या जिले की गोसाईगंज सीट से सपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे।
गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह ने भाजपा में शामिल होने का ऐलान करते हुए सपा की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पार्टी पर परिवारवाद और जातिवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने कहा कि वह ऐसी राजनीति के साथ आगे नहीं चल सकते, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हों।
2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा घटनाक्रम
तीनों विधायकों के एक साथ भाजपा में शामिल होने को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, तीनों नेताओं को आगामी चुनाव में भाजपा के टिकट पर उतारने की संभावना पर भी चर्चा है। हालांकि, उनकी उम्मीदवारी को लेकर अभी किसी आधिकारिक घोषणा की जानकारी नहीं है।
तीनों विधायक अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक प्रभाव रखते हैं। ऐसे में भाजपा की कोशिश उनके जरिए संबंधित क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को साधने की हो सकती है।
14 अक्टूबर को अमेठी में होने वाला कार्यक्रम उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। तीनों विधायकों की औपचारिक सदस्यता के बाद उनके राजनीतिक भविष्य और आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
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