इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिरोजाबाद के सदर बाजार स्थित पुरानी मंडी में प्रस्तावित घंटाघर के निर्माण पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। अदालत ने मौजूदा दौर में घंटाघर की आवश्यकता को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि जब लोगों के पास मोबाइल फोन और उसमें समय देखने की सुविधा उपलब्ध है, तो 55 साल बाद घंटाघर बनाने का फैसला क्यों लिया गया।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने फिरोजाबाद निवासी दुकानदार गौरव गोयल की याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
दुकानदार ने कारोबार प्रभावित होने की जताई आशंका
याची गौरव गोयल का कहना है कि प्रस्तावित घंटाघर उनकी दुकान के सामने बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, निर्माण से कारोबार प्रभावित हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रस्तावित स्थान व्यस्त बाजार में है और वहां पर्याप्त पार्किंग की सुविधा नहीं है।
याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने घंटाघरों की ऐतिहासिक उपयोगिता का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि एक समय घंटाघर समय जानने का प्रमुख साधन हुआ करते थे और उस दौर में लोग इन पर निर्भर रहते थे। लेकिन वर्तमान समय में मोबाइल फोन और घड़ियों के जरिए आसानी से समय देखा जा सकता है।
1970 में दान की गई थी जमीन
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि वर्ष 1970 में रामस्वरूप गोविंद राम गोयल की ओर से नगर पालिका को घंटाघर बनाने के लिए जमीन दान की गई थी। कोर्ट ने कहा कि जमीन दान किए जाने के करीब 55 साल बाद नगर निगम की ओर से निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
अदालत ने मौजूदा समय में घंटाघर निर्माण की उपयोगिता को लेकर सवाल उठाए और कहा कि जमीन का इस्तेमाल किसी समकालीन सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किया जा सकता है, जो मूल समर्पण के उद्देश्य के करीब हो।
नगर निगम को नीति स्तर पर लेना होगा फैसला
हाईकोर्ट ने कहा कि दान की गई जमीन के वैकल्पिक सार्वजनिक उपयोग को लेकर फैसला नगर निगम को नीति के स्तर पर करना होगा। अदालत ने सभी प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
फिलहाल अदालत के आदेश के चलते प्रस्तावित घंटाघर का निर्माण अगली सुनवाई तक नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर 2026 को होगी।
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